SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 687
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ F ५६८ } प्रश्न :--- - चौबीस तिर्थंकरों में कोन कोनों ने समुद्धात किया ? विका और बिलनाथजी ने समुद्घात किया । उत्तर:-- १६९ महापुषका वन- भरत क्षेत्र में जिनागम में १६६ महापुरुष कहे गए हैं । ये विशेष पुण्याधिकारी होते हुए अंत में मोक्ष पदवी को प्राप्त करते हैं। उनके विषय में ज्ञातव्य बातों पर प्रकाश डाला जाता है । : १६९ महापुरुषों के नाम कुलकर या मनु क्रमांक १० ११ तीर्थंकरों के पिता तीर्थंकरों की माता तीर्थंकर संख्या १४ २४ - २४ २४ .१२ सकल चक्रवर्ती बलदेव वासुदेव (नारायण) प्रतिवासुदेव ( प्रतिनारायण ) ६ नारद ६ रुद्र कामदेव € १.१ २४ विशेष कथन ये तीसरे काल के अंत में होते हैं । तथा सभी उर्ध्वगामी होते हैं सभी उर्ध्वगामी होते हैं । सभी उर्ध्वगामी होती हैं । ये सब चीथे काल में होते हैं और सभी मोक्षगामी होते हैं । कोई. मोक्षगामी कोई उगामी कोई अधोगामी होते हैं । सभी उर्ध्वगामी होते हैं । सभी अधोगामी होते हैं । 23 [ गो. प्र. चिन्तामणि 27 は 31 " " 12 " सब मोक्षगामी होते हैं । $1 १६ε इन १६६ महापुरुषों में इस हुंडावसर्पिणी काल के प्रभाव से कुछ संख्या में न्यूनता आ गई है | इसलिये शाँतिनाथ, कुन्थुनाथ तथा अरनाथ इन तीन तीर्थकरों
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy