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अध्याय : आठवां ]
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पर समान जाति वाले परमाणुओं का भी बन्ध होता है, केवल विसदृश जाति वाले परमाणुओं का ही नहीं। बन्ध होने का अन्तिम निर्णय----
अधिकादिगुरखानान्तु ॥१२७२॥ . दो से अधिक गुण वाले परमाणुओं का बन्ध होता है । तु शब्द का प्रयोग पाद पूरण अवधारण, विशेषण और समुच्चय इन चार अर्थों में होता है, उनमें से यहाँ तु शब्द विशेषाणार्थक है। पूर्व में जो बन्ध. का निषेध किया गया है, उसका प्रतिषेध करके इस सूत्र में बन्ध का विधान किया गया है। दो गुण वाले स्निग्ध परमाणु का एक, दो और तीन गुरा बाले स्निग्ध या रुक्ष परमाणु के साथ बन्ध नहीं होगा, किन्तु चार गुण वाले स्निग्ध या रुक्ष परमाणु के साथ बन्ध होगा। दो गुण वाले स्निग्ध परमाणु का पांच, छह आदि अनन्त गुण वाले स्निग्ध या रुक्ष परमाणु के साथ भी बन्ध नहीं होगा । तीन गुण वाले स्निग्ध परमाणु का पाँच गुण वाले स्निग्ध या मक्ष परमाणु के साथ ही बन्ध होगा अन्य गुण वाले परमाणु के साथ नहीं । इसी प्रकार दो गुण वाले रुक्ष परमाणु का चार गुण वाले रुक्ष या स्निग्ध परमाणु के साथ ही बन्ध होगा और तीन गुण वाले रुक्ष परमाणु का पांच गुण वाले रुक्ष या स्निग्ध परमाणु के साथ ही बन्ध होगा, अन्य गुण वाले परमाणु के साथ नहीं । अतः दो गुण अधिक होने पर समान और असमान , जाति वाले परमारण ओं का परस्पर में बन्ध होता है।
बन्ऽधिको पारिवामिको च ॥१२७३॥
बन्ध में अधिक मुरण वाले परमाणु कम गुण वाले परमाणुओं को अपने में परिणत कर लेते हैं । नूतन अवस्था को उत्पन्न कर देना पारिणामिकत्व है । जैसे गीला गुड़ अपने ऊपर गिरी हुई धूलि को गुड़रूप परिणत कर लेता है, उसी प्रकार चार गुरण वाला परमाणु दो गुण वाले परमाणु को अपने रूप में परिगत कर लेता है, अर्थात् उन दोनों की पूर्व अवस्थाएँ नष्ट हो जाती हैं । एक तीसरी ही अवस्था उत्पन्न होती है । उनमें एकता हो जाती है । यही कारण है कि अधिक गुण वाले परमाणुओं का ही बन्ध होता है । समगुण वाले परमाणुओं का नहीं। यदि अधिक गुण परमाणुओं को पारिणामक न माना जाय तो बन्ध अवस्था में भी परमाणु सफेद और काले तन्तुओं से बने हुए कपड़े में तन्तुओं के समान पृथक् पृथक ही रहेंगे, उनमें एकत्व