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________________ । अध्याय : पहला ] [ ११ . प्रश्न :---शोक कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से जीव को इष्ट वियोग होने पर गोकं हो, उसे शोक ... कर्म कहते हैं । प्रश्न :----भय कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से जीव को भय या उद्वेग होता हो, उसे भय कर्म कहते हैं, इस कर्म के कारण जीव नित्य ही भयभीत रहता है। प्रश्न :---जुगुप्सा कर्म का क्या स्वरूप है ? . उत्तर :---जिस कर्म के उदय से जीव को दुसरों से ग्लानि या घृणा उत्पन्न होती हो,. . उसे जुगुप्सा कर्म कहते हैं। प्रश्न :---प्रायु कर्म का स्वरूप क्या है ? उत्तर:--जो आत्मा के अवगाहन गुरग को रोकता है और जिस से जीव नारकी, तिर्यञ्च, मनुष्य, देव के शरीरों में रुका रहता है, उसे आयु कर्म कहते हैं । प्रश्न :--नरकायु का क्या स्वरूप है ? उत्तर :---जिस कर्म के उदय से जीव नारकी के शरीर में रुका रहता है, उसे नरकायु कहते हैं । प्रश्न :--तिर्यञ्चायु का क्या स्वरूप है ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से जीव तियंच के शरीर में रुका रहता है, उसे तिर्यञ्चायु .. कहते हैं। प्रश्न :--मनुष्यायु का क्या स्वरूप है ? .. उत्तर :--जिस कर्म के उदय से जीब मनुष्य के शरीर में रुका रहता है, उसे मनुष्यायु ...... कहते हैं । प्रश्न :-देवायु का क्या स्वरूप हैं ? उत्तर :--जिस कर्म के उदय से जीव देव के शरीर में रुका रहता है, उसे देवायु :: .. कहते हैं । प्रश्न :--नाम कर्म का क्या स्वरूप है ? .. .
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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