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________________ shradha dont stor १० ] [ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :- इस अनन्तानुबंधी कषाय की चौकडी का वासना काल कितना है ? उत्तर :- कर्म प्रकृतियों का वासना काल शास्त्रों में उत्कृष्ट ( अधिक से अधिक ) और जघन्य ( न्यूनतम) दो प्रकार से बताया गया है। अनन्तानुबंधी चौकडी का उत्कृष्ट वासना-काल अनन्त भवों तक चलता है और जघन्य - काल, ग्रन्तमुहूर्त है । प्रश्न :- प्रप्रत्याख्यानावरण कषाय की चौकडी का वासना-काल कितना है ? उत्तर :-- प्रप्रत्याख्यानावरण - कषाय की चौकडी का उत्कृष्ट वासना-काल छह महिना और जधन्य अन्तर्मुहूर्त है । प्रश्न : - - प्रत्याख्यानावरण कषाय की चौकडी का वासना-काल कितना है ? उत्तर :----प्रत्याख्यानावरण कराय की चौकडी का उत्कृष्ट वासना-कांल पंद्रह दिन और जघन्यन्तमुहूर्त है । प्रश्न :-- संज्वलन - कषाय की चौकडी का वासना काल कितना है ? उत्तर :--संज्वलन कपाय की चौकडी का उत्कृष्ट वासना काल अन्तमुहूर्त और जवन्य मुहूर्त ही हैं । भी नौ भेदवाली प्रकषाय वेदनीय कर्मप्रकृति का वर्णन करते हैं । प्रश्न :-- हास्य कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से हास्य प्रगट हो, वह हास्य कर्म है । प्रश्न : - - रति कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिस कर्म के उदय से जीव को धन-पुत्रादि में विशेष प्रीति हो, उसे रति कर्म कहते हैं । प्रश्न :- अरति कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--- जिस कर्म के उदय से जीव को धन-पुत्रादि में विशेष-प्रीति न हो उसे अरति) कर्म कहते हैं । चोंडी का न्तानुबंधी से सम्बन्धित - क्रोध, मान, माया और लोभ यै: चार कषाय जानना ।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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