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अध्याय: पहला ] उत्तर :--जिस क्रोध कषाय के उदय से जीव यथाख्यात चारित्र धारण नहीं कर सके,
वह संज्वलन क्रोध कपाग्य है । जल रेखा के समान होती है। जल (पानी) . में रेग्या. खींचने पर जल्दी मिट जाती है, उसी प्रकार ये कपाय जल्दी मिट
.. जाती है । इस कषाय वाला जीव भी यथाख्यात चारित्री नहीं हो सकता। प्रश्न :-संज्वलन मान कषाय का क्या स्वरूप है ? उत्तर:-जिस मान कयाय के उदय से जीव यथाख्यात चारित्र धारणा नहीं कर सकता।
उसे संज्वलन मान कषाय कहते हैं । यह बैंत के समान शीनं नमने वाली
· होती है। प्रश्न :-संन्वलन माया कषाय का क्या स्वरूप है ? उत्तर :-जिस माया कयाय के. उदय से यथाख्यात संयम न हो सके, वह संज्वलन
..माया कषाय है । यह संज्वलन माया खुरपे के समान टेढी होती है । प्रश्न :--संज्वलन लोभ कषाय का क्या स्वरूप है ? । उत्तर :--जिस लोभकषाय के उदय से जीव यथाण्यात चारित्रन धारण कर सके, वह संज्वलन लोभ कषाय है । यह हल्दी के समान शीत्र छुटने वाली कषाय है ।
कोष्टक . ..
HERE:
दृष्टान्त
पाय .
इप्टान्न
.. काय
अष्टान्न ।
कपाय
इप्टान्त
.
अनतानुबंधी
नीलाभेद अनंतानुबंधी
मान
| पत्थरभेद
अनंतानुबंधी | यांस की जड़ अनंतानुयंधी माया
.. . लोमा
क्रिमीरंग .
परमात्मान
पृथवी
नागन
.
| अप्रत्याख्यान
মাল
अप्रत्याख्यान मेढासींग अप्रत्याध्यान माया
1. लोभ
प्रत्याख्यान शोध...
बुलिरेखा।
काठ
प्रत्यारुपान. | मान
प्रत्याश्यान माया
| प्रत्याश्यान । शरीरमल
लोभ
संज्वलन
जल
बत
संज्वलन मान
संज्वलन माया
नुरपा
संज्वलन सीमा ।