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[ गो. प्र. चिन्तामरिए
महेन्द्र स्वर्ग में जघन्य आयु है । इसी क्रम से विजयादि चार विमानों तक जघन्य श्रायु जान लेना चाहिए।
नारकियों की अघन्य श्रायु
'नाकारणाञ्च द्वितीयादिषु ।।१२३२॥
पहिले-पहिले के नरकों को उत्कृष्ट श्रायु दूसरे आदि नरकों में जघन्य श्रायु होती है । इस प्रकार दूसरे नरक में जघन्य श्रायु एक सागर और सातवें नरक की जघन्य प्रयु बाईस सागर की हैं।
दशवर्षसहस्त्राणि प्रथमायाम् ॥१२३३।।
पहिले नरक में जघन्य श्रायु दश हजार वर्ष की है। यह जघन्य आयु प्रथम पटल में है। प्रथम पटल की उत्कृष्ट स्थिति नब्बे हजार वर्ष, द्वितीय पटल की जघन्य आयु है । इसी प्रकार आगे के पटलों जघन्य आयु का क्रम समझ लेना चाहिये ।
Hanaासियों को जधन्य श्रायुभवनेषु च ।। १२३४॥
Hearts की जन्य आयु दश हजार वर्ष की है।
व्यन्तरों की जघन्य श्रायु
व्यन्तराखाञ्च ।। १२३५।।
व्यन्तर देवों की भी जघन्य श्रायु दश हजार वर्ष की है । व्यन्तरों की उत्कृष्ट स्थिति
परा पल्योपमधिकम् ॥१२३६।१
व्यन्तर देवों की उत्कृष्ट आयु एक पल्य से कुछ अधिक है ।
ज्योतिषी देवों को उत्कृष्ट श्रायु-
ज्योतिष्काणाञ्च ॥ १२३७॥
ज्योतिषी देवों की उत्कृष्ट आधु कुछ अधिक एक पल्य की हैं ।
मदष्टभागोऽपरा ।।१२३८॥
ज्योतिषी देवों की जघन्य श्रायु एक पल्य के आठवें भाग प्रमाण हैं ।