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downwivingNERRIशालामा
अध्याय : सातवा ]
[ ५१६ . ज्योतिषी देवों के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह नक्षत्र और तारा ये पांच भेद हैं । ज्योति (प्रकाश) युक्त होने के कारण इनको ज्योतिषी कहते हैं ।
इस पृथ्वी से सात सौ नव्वे योजन की ऊंचाई पर ताराओं के विमान हैं। .... ताराओं से दस योजन ऊपर सूर्य के विमान है। सूर्य से अस्सी योजन ऊपर चन्द्रमा का विमान है । इसके बाद चार योजन ऊपर नक्षत्र हैं । नक्षत्रों से चार योजन अपर बुध, बुध से तीन योजन ऊपर शुक्र, शुक्र से तीन योजन ऊपर बृहस्पति, बृहस्पति से तीन . योजन ऊपर मंगल और मंगल से तीन योजन ऊपर शनैश्चर देव रहते हैं । इस प्रकार मंगल से एक सौ दश योजन प्रमाण प्रकाश में ज्योतिषी देव रहते हैं। सूर्य से कुछ कम एक योजन नीचे केतु और चन्द्रमा से कुछ कम एक योजन नीचे राहु रहते हैं।
,सब ज्योतिषी देवों के विमान के ऊपरं स्थित पद्धगोलका के आकार के होते हैं । चन्द्रमा, सूर्य और ग्रहों को छोड़कर शेष ज्योतिषी देव अपने-अपने एक ही .. मार्ग में गमन करते हैं। ज्योतिषी देवों की पति
मेरु प्रदक्षिणा नित्यगतयो नृलोके ॥१२१०॥ ... . . . . . . . . . .... मनुष्य लोक के ज्योतिषी देव मेरु को प्रदक्षिणा देते हुए सदा गमन करते रहते हैं। मनुष्य लोक के बाहर ज्योतिषी देव स्थिर रहते हैं। प्रश्न ::-ज्योतिषी देवों के विमान अचेतन रहते हैं। उनमें गमन कैसे
सम्भव है? उत्तर :--प्राभियोग्य जाति के देवों द्वारा ज्योतिषी देवों के विमान खींचे .. जाते हैं। आभियोग्य देवों का कम विपाक अन्य ज्योतिषी देवों के विमानों को खींचने .. पर ही होता है । मेरु से ग्यारह सौ इक्कीस योजन दूर रहकर ज्योतिषी देव भ्रमण करते रहते हैं। ... जम्बूद्वीप में दो सूर्य, छप्पन नक्षत्र और एक सौ छिहतर ग्रह हैं । लवण समुद्र में चार सूर्य, एक सौ बारह नक्षम और तीन सौ बावन ग्रह हैं। .....
__ . धातकी खंड द्वीप में बारह सूर्य, तीन सौ छत्तीस नक्षत्र और एक हजार छप्पन ग्रह हैं । कालोद समुद्र में बयालीस सूर्य, ग्यारह सौ छिहत्तर नक्षत्र और तीन हजार छह सौ निन्यानवे ग्रह हैं । और पुष्करार्द्ध द्वीप में बहत्तर सूर्य, दो हजार सोलह नक्षत्र, छह हजार तीन सौ छत्तीस ग्रह हैं । चन्द्रमाओं को संख्या सूर्य के बराबर है।