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________________ pathma ॥ | ५१८ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि भवनवासी देवों के असुर कुमार, नाम कुमार, विद्युत कुमार, सुपर्ण कुमार, अग्नि कुमार, वात कुमार, स्तमित कुमार, उदधि कुमार, द्वीप कुमार, दिक्कुमार-ये दश भेद हैं। . . . ........ .. .. . भवनों में रहने के कारण इन्हें भवनवासी कहते हैं। ... असुर कुमार---जो परस्पर में लडाकर उनके प्रारणों को लेते हैं, उन्हें असुर कुमार कहते हैं । ये तृतीय नरक तक के नारंकियों को दुःख पहुंचाते हैं। ...... नाग कुमार--पर्वत या वृक्षों पर रहने वाले देव नागकुमार देव कहा . जाता है । ....... ... .. ...विधुत कुमार-जो विद्युत के समान चमकते हैं, वे विधुत कुमार हैं। ... सुपर्ण कुमार-जिनके पक्ष (पंख) शोभित होते हैं, वे सुपर्ण कुमार हैं। .. ... : अग्नि कुमार---जो पाताला लोक से क्रीड़ा करने के लिये ऊपर पाले हैं, वे अग्नि कुमार कहलाते हैं। ... वात कुमार:-तीर्थंकर के विहार मार्ग को शुद्ध करने वाले वातकुमार हैं। : ... स्तनित कुमार .... शान करने वाले को गोलि कमार कहते हैं । . उदधि कुमार--- समुद्रों में क्रीड़ा करने वाले उदधि कुमार हैं। द्वीप कुमार-द्वीपों में क्रीडा करने वाले द्वीप कुमार हैं। ....... दिवकुमार--दिशानों में क्रीड़ा करने वाले दिक्कुमार हैं। ... असुर कुमारों के प्रथम नरक के पङ्कबहुल भाग में और शेष भवनवासी देवों । के खरबहुल भाग में भवन हैं। न्यन्तर देवों के भेष- ... . . . . ... व्यन्तराः किन्न कम्पुरुष मष्टोरग गन्धर्व यक्ष राक्षस भूत पिशाचाः ।।१२०६॥ . . अन्तर देवों के . किन्नर, किम्पुरुष, महोग, गन्धर्व, यक्ष, राक्षस, भुत, पिशाच-ये आठ भेद होते हैं । . . . . . . नाना देशों में निवास करने के कारण इनको व्यन्तर कहते हैं । जम्बूद्वीप के असंख्यात.द्वीप समुद्र को छोड़कर, 'प्रथम नरक के खर भाग में राक्षसों को छोड़कर अन्य सात प्रकार के व्यन्तर रहते हैं और पङ्क भाग में राक्षस रहते हैं। ज्योतिषी देवों के भेद--- ... .. .. ज्योतिरकाः सूर्याचन्द्रमसौ ग्रह नक्षत्र प्रकोणक: तारकाश्च ।।१२०६॥
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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