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________________ ५१२ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि ऊपर हैं। इन द्वीपों में उत्पन्न होने वाले मनुष्य अन्तर्वीपज कहलाते है। - पुलिन्द, शबर, यवन, खस, बर्बर आदि कर्म भूमिज म्लेच्छ हैं। कर्मभूमियों का वर्णन भरतैरावत विदेहाः कर्मभूमयोऽन्यत्र देवकुरुत्तर कुरुभ्यः ॥११९६॥ पाँच भरत, पाँच ऐरावत और देवकुरु एवं उत्तर कुरु को छोड़कर पाँच विदेह इस प्रकार पन्द्रह कर्मभूमियां हैं । इसके अतिरिक्त भूमियां भोगभूमि ही हैं, किन्तु अन्तद्विपों में कल्पवृक्ष नहीं होते हैं। ___ भोगभूमि के सब मनुष्य मरकर देव ही होते हैं। किसी प्राचार्य का ऐसा मत है कि चार अन्तर्वीप है, वे कर्मभूमि के समीप हैं । अतः उनमें उत्पन्न होने वाले मनुष्य चारों गतियों में जा सकते हैं। मानुषोत्तर पर्वत के प्रागे और स्वयम्भूरमरण द्वीप के मध्य में स्थित स्वयंप्रभ पर्णत के पहिले जितने द्वीप हैं, उन सबमें एकेन्द्रिय और पञ्चेन्द्रिय जीव ही होते हैं। ये द्वीप कुभोगभूमि कहलाते हैं । इनमें असंख्यात वर्ष की आयु वाले और एक कोस ऊंचे पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्च ही होते हैं, मनुष्य नहीं। इनके नादि के चार गुणस्थान ही हो सकते हैं। मानुषोत्तर पर्वत सत्रह सौ इक्कीस योजन ऊंचा है, और चार सौ तीस योजन भूमि के अन्दर है, मूल में एक सौ बाईस योजन, मध्य में सात सौ तेतीस योजन, ऊपर चार सौ चौबीस योजन विस्तार वाला है । मानुषोत्तर के ऊपर चारों दिशाओं में चार चैत्यालय हैं। सर्वार्थसिद्धि को देने वाला उत्कृष्ट शुभ कर्म और सातवें नरक में ले जाने वाला उत्कृष्ट अशुभ कर्म यहीं पर किया जाता है । तथा असि, मसि, कृषि, वाणिज्य आदि कर्म यहीं पर किया जाता है. इसलिये इनको कर्मभूमि कहते हैं । यद्यपि सम्पूर्ण जगत में ही कर्म किया जाता है, किन्तु उत्कृष्ट शुभ और अशुभ कर्म का प्राश्रय होते से इनको ही कर्मभूमि कहा गया है। स्वयम्प्रभ पर्वत से पामे लोक के अन्त तक जो तिर्यञ्च हैं, उनके पांच गुरंगस्थान हो सकते हैं । उनकी आयु एक पूर्व कोटि की है। वहां के मत्स्य सातवें नरक में ले जाने वाले पाप का बन्ध करते हैं। कोई कोई थलचर जीत स्वर्ग प्रादि के - -
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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