________________
अध्याय : सातवां ]
[ ४ee
पहले होना चाहिए, लेकिन उत्सर्पिणी शब्द को अल्प स्वरवाला होने से पहले
कहा है ।
सुषमा सुषमा चार कोड़ा कोड़ी सागर, सुषमा तीन कोडा - कोडी सागर सुपमा दुःपमा दो कोड़ा कोड़ी सागर, दुषमा सुषमा बयालीस हजार वर्ष कम एक कोड़ा कोड़ी सागर, दुःषमा इवकीस हजार वर्ष और अति दुःषमा इक्कीस हजार वर्ष का है ।
अवसर्पिणी के प्रथम काल में उत्तम भोग भूमि की, द्वितीय काम में मध्यम भोग भूमि की और तृतीय काल में जघन्य भोग भूमि की रचना होती है । तृतीय काल में पल्य के आठवें भाग बाकी रहने पर सोलह कुलकर उत्पन्न होते हैं । पन्द्रह कुलकरों की मृत्यु तृतीय काल में हो ही जाती है, लेकिन सोलहवें कुलकर की मृत्यु चौथे काल में होती है ।
प्रथम कुलकर की आयु पल्य के दशम भाग प्रभार है। ज्योतिरङ्ग hereक्षों की ज्योति के मन्द हो जाने के कारण चन्द्र और सूर्य के दर्शन से मनुष्यों को भयभीत होने पर प्रथम कुलंकर उनके भय का निवारण करता है । द्वितीय कुलकर की आपल्य के सौ भागों में से एक भाग प्रमाण है । द्वितीय कुलकर के समय में तारायों को देकखर भी लोग डरने लगते हैं, ग्रतः वह उनके भय को दूर करता है । तृतीय कुलकर की आयु पत्य के हजार भागों में से एक भाग प्रसारण है । वह सिंह, व्याघ्र प्रादि हिंसक जीवों से उत्पन्न भय का परिहार करता है । चतुर्थ कुलकर की आयु पल्य के दश हजार भागों में से एक भाग प्रमाण है । वह सिंह, व्याघ्र आदि के भय को निवारण करने के लिये लाठी श्रादि रखना सिखाता है । पांचवे कुलकर की आयु पल्य के लाख भागों में से एक भाग प्रमाण है । वह कल्प वृक्षों की सीमा को वचन द्वारा नियत करता है, क्योंकि उसके काल में कल्प वृक्ष कम हो जाते हैं और फल भी कम लगते हैं । छटवें कुलकर की प्रायु पल्य के दश लाख भोगों में से एक भाग प्रसारण है । वह गुल्म आदि चिन्हों से कल्प वृक्षों की सीमा को नियत करता है, क्योंकि उसके काल में कल्प वृक्ष बहुत कम रह जाते हैं और फल भी अत्यल्प लगते हैं। सातवें कुलकर की भ्रा पत्य के करोड़ भागों में से एक भाग प्रमाण हैं । वह शूरता के उपकरणों का उपदेश और हाथी यादि पर सवारी करना सिखाता है । आठवें कुलकर की प्रायु पल्य के दश करोड़ भागों में से एक भाग