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________________ -- ... - - SHAMM - ' [ गो. प्र. चिन्तामणि ... भरत क्षेत्र के विस्तार से हिमवान् पर्वत का विस्तार दूना है । हिमवान् पर्वत के विस्तार से हैमवत् क्षेत्र का विस्तार दूना है । यही क्रम विदेह क्षेत्र पर्यन्त है । विदेह क्षेत्र के विस्तार से नील पर्वत का विस्तार आधा है । नील पर्वत के विस्तार से रम्यक क्षेत्र का विस्तार प्राधा है । यह क्रम ऐरावत क्षेत्र पर्यन्त है ।। __ उत्तरा दक्षिणतुल्या: ।।११८५॥ उत्तर के क्षेत्र और पर्वतो. का विस्तार दक्षिण के क्षेत्र और पर्वतों के विस्तार के समान है । अर्थात् रम्यक, हैरण्यवत् और ऐरावत क्षेत्रों का विस्तार क्रम से हरि हैमवत और भरत क्षेत्र के विस्तार के समान है । नील, रुक्मि और शिखरी पर्नतों का विस्तार क्रम से निषध, महाहिमवान् और हिमवान् पर्वतों के विस्तार के बराबर है। भरत और ऐरावत क्षेत्र में काल का परिवर्तनभरातैरावतयो वृद्धिह्नासौ षट् समयाभ्यामुत्सपिण्यवसर्पिणीभ्याम् ॥११८६३ भरत और ऐरावत क्षेत्र में उत्सर्पिणी और अक्सपिरणी काल के छह समयों द्वारा जीवों की आयु, काय, सुख प्रादि की वृद्धि और हानि होती रहती है । होत्रों की हानि वृद्धि नहीं होती। कोई प्राचार्य "भरतैरावतयोः' पद में षष्ठी द्विवचन न मानकर सप्तमी का द्विवचन मानते हैं । उनके मत से भी उत्सर्पिणी और अवपिरणी काल के द्वारा भरत और ऐरावत क्षेत्र की वृद्धि और हानि होती है, किन्तु भरत और ऐरावत क्षेत्र में रहने वाले मनुष्यों की प्रायु उपभोग आदि की वृद्धि और हानी होती है। उत्सपिगी काल में आयु और उपभोग आदि की वृद्धि और अवसर्पिणी काल में हानि होती है। प्रश्न :-छहों काली का वर्णन किस प्रकार है ? उत्तर :- प्रत्येक उत्सपिणी और अक्सगिणी के छह-छह भेद हैं । अबसर्पिणी काल के छह भेव-१. सुषमा सुषमा, २. सुषमा, ३, सुषमा दृषमा, ४. दुःषमा सुषमा, ५ दुषमा, ६. अति दुःषमा । उत्सपिसी काल के छह भेद-१. अति दुःषमा, २. दूषमा, ३. दुधमा सुषमा, ४. सुषमा दुःषमा, ५. सुषमा, ६. सुषमा सुषमा । यद्यपि वर्तमान में प्रवसपिरणी काल होने से सुत्र में अवसपिणी ग्रहण का - AR
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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