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कायकायक-DACIAL
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[ गो. प्र. चिन्तामणि समान है। इनके कमलों का विस्तार भो तिगिच्छ आदि के कमलों के विस्तार के संमान है। कमलों में रहने वाली देवियों के नाम--
तन्निवासिन्यो वेन्यः श्री हो ति कीति बुद्धिलक्ष्म्यः पल्योपम स्थित्यः संसामानि रिसत्काः ।।११३८
उन पद्म प्रादि सरोवरों के कमेलों पर क्रम से श्री, ही, धृति, कीर्ति, बुद्धि... और लक्ष्मी ये छह देवियां सामानिक और परिषद जाति के देवों के साथ निवास करती हैं। देवियों की आयु एक पल्य है ।
छहों कमलों की कणिकाओं के मध्य में एक कोस लम्बे, अर्द्ध कोस चौड़े और कुछ कम एक कोस ऊँचे इन देवियों के प्रासाद हैं, जो अपनी कान्ति से शरद् ऋतु से निर्मल चन्द्रमा की प्रभा को भी तिरस्कृत करते हैं । कमलों के परिवार कमलों पर सामानिक और परिषद् देव रहते हैं। श्री, ह्री, धूति देवियां अपने परिवार सहित सौधर्म इन्द्र की सेवा में तत्पर रहती हैं। .. नदियों का वर्णन और उनके नाम
___ गंमा सिन्धु रोहिद्रोहितास्या हरिद्वारकान्ता सीता सीतोदा नारी नरकान्ता सुवर्ण रूप्यफूलारक्तारक्तोदाः सरितस्तस्तन्यध्यगाः ॥११७६।।
. गङ्गा, सिन्धु, रोहित्, रोहितास्या, हरित्, हरिकान्ता, सीता, सीतोदा, नारी, नरकान्ता, सुवर्णकूला, रूप्यकूला, रक्ता और रक्तोदा ये चौदह नदियां भारत आदि सात क्षेत्रों में बहती हैं। नदियों के बहने का क्रम
द्वयो योः पूर्वाः पूर्यगाः ।।११८० .
दो-दो नदियों में से पहली-पहली नदी पूर्व समुद्र में जाती है । अर्थात् गङ्गासिन्धु में गङ्गा नदी पूर्व समुद्र को जाती है, रोहित्-रोहितास्या में रोहित नदी पूर्व समुद्र को जाती है । यही क्रम आगे भी है। . हिमवान् पर्वत के अपर जो २म हद है। उसके पूर्व तोरणद्वार से गंगा नदी निकली है जो विजयाई पर्वत को भेदकर मलेच्छ खण्ड में बहती हुई पूर्व समुद्र में मिल जाती है। पद्महद के पश्चिम तोरण द्वार से सिन्धु नदी निकली है, जो विजयाद्ध पर्वत को भेदकर म्लेच्छ खण्ड में बहती हुई पश्चिम समुद्र में मिल जाती
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