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अध्याय : सातवां ]
। ४६३ उन पर्वतों के तद नाना प्रकार के मरिणयों से शोभायमान हैं, जो दव, विद्याघर और चारण ऋषियों के चित्त को भी चमत्कृत कर देते हैं। पर्वतों का विस्तार "ऊपर, नीचे और मध्य में समान है। पर्वतों पर स्थित सरोवरों के नाम ... . ::::
पद्य महापातिगिच्छ केशरि महापुण्डराक पुण्डरीका हुदास्तेसाभुपरि॥११७३॥
.. हिमवान् आदि पर्वतों के ऊपर कम से पद्म, महापा, तिगिच्छ, केसरी, महापुण्डरीक और पुण्डराक ये छह सरोवर हैं। .. . ... .. प्रथम सरोवर की लम्बाई, चौड़ाई
प्रथमो योजन सहस्त्रायामस्तबद्ध विष्कम्भो हृदः ॥११७४।। . . हिमवान् पर्वत के ऊपर स्थित प्रथम सरोवर एक हजार. योजन लम्बा और पांच सौ. योजन चौड़ा है । इसका तल भाग वनमय और तट नाना रत्नमय है। प्रथम सरोवर को गहराई
दश योजनावगाहः ॥११७५॥
पद्म सरोवर दश योजन गहरा है। . . पम सरोवर में कमल किसमा- लम्बा चौड़ा है--. :
सम्मध्ये योजनं पुष्करम् ।।११७६॥ .. ... : पद्म सरोवर के मध्य में एक योजन विस्तार वाला कमल है। एक कोस लम्बे उसके पत्ते हैं और दो कोस विस्तार युक्त करिएका के मध्य में एक कोस प्रमाण विस्तृत श्री देवी का प्रसाद है । यह कमल जल से दो कोस ऊपर है । पत्र' भौर करियका के विस्तार सहित कमल का विस्तार एक योजन होता है। "अन्य सरोवरों के विस्तार प्रादि का वर्णन....... तद्विगुणाद्विगुणा हमाः पुष्कराणि च ॥११७७।।
आगे के सरोवरों और कमलों का विस्तार प्रथम सरोवर और उसके कमल ..... के विस्तार से दुना-दूना है । ..अर्थात् महा पद्म दो हजार योजन लम्बा, एक हजार
योजन चौड़ा और बीस योजन गहरा है । इसके कमल का विस्तार दो योजन है। इसी
प्रकार: महापद्म के विस्तार से दूना विस्तार तिगिच्छ हुद का है। केसरी, महापुण्डरीक, ... . और पुण्डरीक हृदों का विस्तार क्रम से तिगिच्छ, महापद्म और पन हृद के विस्तार के