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________________ अध्याय: सातवां ] नरकों में आयु वर्णनdear परा स्थितिः ॥११६५॥ उन नरकों से नारकी जीवों की उत्कृष्ट आयु क्रम से एक सागर, तीन सागर, सात सागर, दश सागर, सत्रह सागर, बाईस सागर और तेतीस सागर है । प्रथम नरक के प्रथम पटल में जघन्य श्रायु १० हजार वर्ष है । प्रथम पटल में जो उत्कृष्ट आयु है, यही द्वितीय पटल में जघन्य आयु है । यही क्रम सातों नरकों में है । पटल १ नरक ६० १ हजार वर्ष ५ पटलों में उत्कृष्ट स्थिति इस प्रकार है २ ६ ७ ६० लोख वर्ध -- [ ४८३ सप्त दश सप्त वश द्वाविंशति त्रयस्त्रत्सागरोपमा सत्यानां है ३ श्रस. पूर्वं ཱ Ê༠ ཟྭ ྋ ཟྭ १० १८६२० सागर सागर सागर ५३ सागर २२ ११ १६ ११ सागर सागर सागसार सागर सावर सागर सागर सागर सागर ४ £ म ५ ५० १.. ११ སྒྲོ ༑« བྷྲ ༩ic ཟླ ཀ བྷཱུ :|ཀ ११० १२० १४० १ सागर सागर सागर सागर सागर नायर सागर सागर सागर सायर वगर सागर सागर सामर १ १० सागर सागर सागर सागर सागर सागर सागर सागर सागर ए. ܝܕ सागर सागर सागर सायर सागर सागर सागर ११ 1 ६ १० १० ११ १२ झि to ८ १३ सायर १३ مین
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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