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________________ ४७६ ] [ गो. प्र. चिन्तामरिंग उनके आगे कल्पवासिनी देवियाँ सुशोभित थीं जो ऐसी जान पड़ती थीं मानी भगवान की बाह्याभ्यन्तर विभूतियां ही उनका रूप रखकर स्थित हों । उनके बाद तीसरी सभा में लज्जा, दया, क्षमा शान्ति श्रादि गुण- रूपी सम्पत्ति से सुशोभित श्राविकाऐं विराजमान थीं जो समीचीन धर्म की पुत्रियों के समान जात पड़ती थीं । चौथी सभा में प्रशंसनीय एवं अपने आप से निकलने वाली प्रभा से सुशोभित ज्योतिषी देवों की स्त्रियां बैठी थीं जो भगवान की कान्ति के समान जान पड़ती थीं । पांचवी सभा में मुलिधारिणी वन की लक्ष्मी के समान सुन्दर बनवासी व्यन्तर देवों की स्त्रि स्थित थी तथा वे वन की पुष्प लताओं के समान नत्रीभूत हो भगवान के चरणों को नमस्कार कर रही थीं । - छठी सभा में भगवान् की अत्यधिक भक्ति से युक्त भवनवासी देवों की अंगनाएँ स्थित थीं जो ऐसी जान पड़ती थीं मानो स्वर्गभूमि और अधोलोक की लक्ष्मयाँ ही भगवान के समीप श्राकर बैठी हैं । सातवी सभा में फरणा के समान देदीप्यमान रत्नों की कान्ति से लाल-लाल दीखने वाले भवनवासी देव अपने संसार से भयभीत होते हुए, पाप बन्ध का छेदन करने वाले भगवान् के समीप विद्यमान थे । आठवों सभा में सुन्दर आकार के धारक व्यन्तर देव बैठे थे । वे भगवान् के श्रीभूषण स्वरूप थे तथा फूलों की मालाओं को धारण करने वाले मन्दरगिरि के समान जान पडते थे । rai सभा में, जिनकी अपनी प्रभा भगवान् की प्रभा में निमग्न हो गयी थी, ऐसे सूर्य प्रादि ज्योतिषी देवों के समूह नम्रीभूत हो भगवान् से अपनी प्रभावृद्धि की प्रार्थना कर रहे थे । दसवीं सभा में सौन्दर्य के स्वामी, सुखी एवं ऊपर बैठे हुए भगवान् के श्रंशों के समान इन्द्र आदि कल्पवासी देव सुशोभित हो रहे थे । ग्यारहवी सभा में चक्रवर्ती आदि राजा भगवान् की उपासना करते थे और वे ऐसे जान पड़ते थे मानो शरीरधारी दान-पूजा आदि वर्मो के निर्मल अंश ही हों । बारहवी सभा में जिन्हें अविद्या, वर, माया श्रादि दोषों के नष्ट हो जाने से विद्या, क्षमा आदि तत्तद्गुण प्राप्त हुये थे, ऐसे सिंह, हाथी आदि तिर्यच विद्यमान थे
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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