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________________ पपनस है। . . . [ गो. प्र. चिन्तामणि .. उत्तर :--जिस कर्म के उदय से जीव को मनःपर्यय शान नहीं होता, उसको मनःपर्यय ज्ञानावरण कर्म कहते हैं। प्रश्न :- केवलज्ञानावरण कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से केवलज्ञान न हो, उसको केवलज्ञानावरण कहते हैं । के प्रश्न :-दर्शनावरण कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस कर्म के उदय से प्रात्मा के दर्शन गुण का घात होता है, दर्शन होने में : वाधक जो कर्म हैं, उसे दर्शनावरण कर्म कहते हैं । अब इसके ६ प्रभेदों का स्वरूप वर्णन करते हैं। प्रश्न :- चक्षुदर्शनावरण कर्म किसे कहते हैं ? . . उत्तर:-जो कर्म चक्षु इन्द्रिय से होने वाले सामान्य अवलोकन को नहीं होने दे, उसे चक्षुदर्शनावरण कर्म कहते हैं। प्रश्न :--प्रचक्षुदर्शनावरण कर्म किसे कहते हैं ? उत्तर :--जो कर्म चक्षु इन्द्रिय को छोड़कर शेष इन्द्रियों से तथा मन से होने वाले . . सामान्य अवलोकन को नहीं होने देता, उसे अचक्षुदर्शनावरण कर्म कहते हैं। प्रश्न :----अवधिदर्शनावरण कर्म का स्वरूप क्या है ? उत्तर :-जो कर्म अवधि ज्ञान से पहले होने वाले सामान्य अवलोकन को न होने दे, उसे अवधिदर्शनावरण कर्म कहते हैं । प्रश्न :... केवलदर्शनावरण कर्म का स्वरूप क्या है ? उत्तर :---जो कर्म केवल ज्ञान के साथ होने वाले सामान्य अवलोकन को नहीं होने दे, . उसे केवलदर्शनावरण कर्म कहते हैं । प्रश्न. :-निद्रादर्शनावरण कर्म का स्वरूप क्या है ? .. उत्तर :--जिस कर्म के उदय से नींद आती है. उस कर्म को निद्रादर्शनावरण कर्म कहते हैं। . . . प्रश्न :--निद्रा-निद्रा दर्शनावरण कर्म का स्वरूप क्या है ? . . . उत्तर :-जिस कर्म के उदय से नींद ही नींद आती हो, उस कर्म को निंद्रा-निद्रा __ दर्शनावरण कर्म कहते हैं। ..
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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