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________________ ४६४ ] प्रश्न :- श्रेणी के कितने भेद हैं ? उत्तरः -- दो हैं - एक उपशम श्रेणी और दूसरी क्षपक श्रेणी । प्रश्न :- उपशम श्र ेणी किसे कहते हैं ? उत्तर :- जिसमें चारित्र मोहनीय की २१ प्रकृतियों का उपशम होता है, उसे उपशम श्रेणी कहते हैं । [ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :- क्षपक श्र ेणी किसे कहते हैं ? और कौन-कौन जोव इन दोनों लियों को चढ़ते हैं ? जिसमें चारित्र मोहनीय की २१ प्रकृतियों का क्षय होता है, उसे क्षपक श्रेणी कहते हैं । क्षायिक सम्यग्दृष्टि तो दोनों ही श्रेणी चढ़ते हैं, किंतु द्वितीयोपशम सम्यग्दृष्टि उपशम श्रेणी ही चढ़ता है क्षपक श्रेणी नहीं चढ़ता है । उपशम श्रेणी के चार गुणस्थान है- आठवां, नवां दशवां, ग्यारहवां श्रौर अपक श्रेणी के भी चार गुणस्थान हैं- ग्राठ, नौ, दश, बारहवां । प्रश्न : - श्रधःकरण किसे कहते हैं। ? उत्तर :- जिस करण में ( परिणाम समूह में ) उपरितन समयवर्ती तथा स्तन समयवर्ती जीवों के परिणाम सदृश तथा विसदृश होते हैं, उसे अधःकरण कहते हैं 1 प्रश्नः - अपूर्वकरण गुणस्थान का पया स्वरूप है ? उत्तरः--- जहां प्रत्येक समय में प्रपूर्व प्रपूर्व, नवीन नवीन ही परिणाम होते हैं, उसे पूर्वकरण कहते हैं । इसमें सम समयवर्ती जीवों के परिणाम सदृश तथा विसदृश दोनों प्रकार के होते हैं, परन्तु भिन्न समयवर्ती जीवों के परिणाम विसदृश ही होते हैं । प्रश्न : --- निवृतिकरण गुरपस्थान का क्या स्वरूप ? उत्तर :-- जहां समसमयवर्ती जीवों के परिणाम सदृश हों और भिन्न समयवर्ती जीवों के परिणाम विसदृश ही होते हैं, उसे निवृत्तिकरण कहते हैं । ये पूर्व करणादि परिणाम उत्तरोत्तर विशुद्धता को लिये हुए होते हैं तथा संज्वलन चतुष्क उदय की मन्दता में क्रम से प्रकट होते हैं ।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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