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________________ wirema t u अध्याय : पांचवां ] [ ४३६ शुक्ल ध्यान करने योग्य कौन ? __ प्रादि संहननोपेतः पूर्वज्ञः पुण्यचेष्टितः। : चतुर्विधमपि ध्यानं स शुक्लं ध्यातुमर्हति ॥१०६५॥ जिसके प्रथम-बजतषभनाराच महान है; जो पूर्व अर्थात् ग्यारह अंग चौदह पूर्व का जानने वाला है, और जिसकी पुण्यरूप चेष्टा हो अर्थात् शुद्ध चारित्र हो; वहीं मुनि चारों प्रकार के शुक्लध्यानों को धारण करने योग्य होता है । शुचिगुरण योगाच्छुरूकं कषायरजसः क्षयादुपशमाहा। वैडूर्यमरिणशिखामिध सुनिर्मसं निष्प्रकम्पं च ॥१०६६।। आत्मा के शुचि गुण के सम्बन्ध से इसका नाम शुक्ल पड़ा है; कषाय रूपी रज के क्षय होने से अथवा उपशम होने से जो आत्मा के निर्मल परिणाम होते हैं, वही शुचि मुरण का योग है, और वह शुक्ल ध्यान वैडूर्यमणि की शिखा के समान निर्मल और निष्कंप अर्थात् कंपता से रहित है । कषायमल विश्लेषाप्रशमाद्वाः प्रसूयते । यतः साभतस्तः शुक्ल मुक्त निरुक्तिकम् ॥१०६७।। . पुरुषों के कषाय रूपी मल के क्षय होने से अथवा उपशम होने से यह शुक्ल ध्यान होता है । इसलिए उस ध्यान के जानने वाले प्राचार्यों ने इसका नाम शुक्ल, ऐसा निरुक्ति पूर्वक अर्थात् सार्थक कहा है । छनस्थ योगिनामा तु शुक्ले प्रकीसिते । त्वन्त्ये क्षीण दोषाणां केवलज्ञान चक्षुषाम् ॥१०६८।। शुक्ल ध्यान के पृथकद वितर्क, एकत्व वितर्क, सूक्ष्म क्रिया प्रतिपाति, व्युपरत क्रिया निवृत्ति ऐसे चार भेद हैं; उनमें से पहले के दो अर्थात् पृथकत्व वितर्क और एकत्ववितर्क तो छहास्थ योगी अर्थात बारहवें गुरणस्थान पपन्त अल्प ज्ञानियों के होते हैं और अन्त के दो शुक्ल ध्यान सर्वथा रागादि दोषों से रहित. ऐसे केवल ज्ञानियों के a rikRIEinstimritiindianRATHIANA O RMEETamayaPATRINCRRORE श्रतमानार्थ सम्बन्धाच्छ तालम्चन पूर्वके । पूर्वेपरे जिनेन्द्रस्य मिःशेषालम्बनच्युते ।।१०६६।। प्रथम के दो शुक्ल ध्यान जो कि छद्मस्थों के होते हैं, वे श्रुतज्ञान के अर्थ के सम्बन्ध से. श्रुत ज्ञान के प्रालंबनपूर्वक हैं. अर्थात् उनमें श्रुतज्ञान पूर्दक पदार्थ का TERNManmoonsanskar
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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