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________________ अध्याय : पांचवां ] [ ४०३ अतिचारों को दूर कर, उचित क्रिया से एक दिन विश्रान्ति देकर सारी दैनिक प्रावश्यक क्रियाओं में तथा प्रतिलेखन क्रिया में परस्पर दो तीन दिन तक परीक्षा करते हैं। तदन्तर दूसरे या तीसरे दिन जाकर साधु आचार्य को नमस्कार कर उनके समीप बैठ जाय । तदनन्तर मार्ग में शिष्य यादि चेतन, पुस्तक कमण्डलु आदि अचेतन कोई भी वस्तु प्राप्त हुई हो तो प्राचार्य को अर्पण कर दे। उसके बाद अति विनय भावों से धीरे-धीरे अपने आने के कारण को आचार्य से निवेदन करे । गुरु सन्तान चारित्र शुद्धो शास्त्रो यदीतरः । कृत्वा छेदमुपस्थापनादि शुद्धश्च नेतरः ॥१६४०॥ गुरु की सन्तान और चारित्र जिसका शुद्ध है, ऐसा वह आगन्तुक मुनि ग्रहण करने योग्य है और जो गुरु सन्तान, चारित्र से शुद्ध नहीं हैं, वह छेद करके उपस्थापनादि से शुद्ध है, वह ग्राह्य है। जो प्रायश्चित लेकर शुद्ध नहीं हुआ हो, वह ग्राह्य नहीं है। प्रागन्तुक यति की गुरु परम्परा और चारित्र शुद्ध हो तो प्राचार्य उसको ग्रहण करे । यदि चारित्र आदि में अशुद्धि हुई हो तो प्रायश्चित देकर पुनः नतों की उपस्थापना करे । यदि आगन्तुक मुनि प्रायश्चित ब्रहण नहीं करे तो उसे स्वीकार नहीं करे और उसको अपने संघ में पाश्रय नहीं दे । छोड़ने योग्य श्रोता शिला भग्न घटा जावि डालमृच्चालिनी शुकैः । मशका चाहिमहिषैरपि श्रोतान् समान त्यजेत् ॥४१॥ शिला, भग्नघट, अजा, बिडाल, मिट्टी, चालनी, तोता, मशक, सर्प, भैंसा के समान श्रोताओं को छोड़ देवें । शिला, भग्नघट, बकरी, बिडाल, मिट्टी, चालनी, तोता, मशक, सर्प, भैसा आदि के समान श्रोताओं को छोड़ दें अर्थात् उनको समझाने की चेष्टा नहीं करे।। मिट्टी-सुनते समय ही प्रभावित होने वाले, बाद में जो सुने और समझकर उस पर आचरण नहीं करने बाले । झाडू-सार ग्राहक प्रसार को छोड़ने वाला। भैंसा--सुना, ना सुना दोनों बराबर । हंस-विवेकशील । शुक-जितना सुना उतना ही बिना समझे याद रखने के समान होता है। बिल्ली चालाक पाखण्डी। · बगुलाअर्थात् सुनने का ढोंग करने वाले । मशक-वक्ता तथा सभा को परेशान करने में % 3DATESARSavantICIAS
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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