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________________ ntarwasnax.siriapsee a HiddenAMKATHem अध्याय : पांचवां । साधु चिरकाल से प्रजित को साधु. कहते हैं। ... मनोज्ञ-- लोक में जिनकी वसा जा रही है। उन्हें मनोज्ञ कहते हैं । .. मुनियों की समाचार नीति तनोति संपदं नोतिर्यवृत्त द्वद्गरण श्रियम् । सत्प्रियां या समाचार नीतिः सा कोय॑तेऽधुना ॥६०३।। जिस प्रकार नीति महान सम्पदा को. देने वाली हैं, उसी प्रकार समाचार नीति महान गुरण श्री को देने वाली है। वह मुनियों की समाचार नीति अब कही जाती है। समाचार को निरुक्ति समः समानः सं सम्यगाहारो यः समैयुतेः । प्राचार्यत इति प्राज्ञः स समाचार ईरितः ॥६०४॥ रागद्वेष के अभाव रूप समताभाव है वह समाचार है, अथवा सम्यक् अर्थात् प्राचार रहित जो मूलगुरगों का अनुष्ठान पाचरण है वह समाचार है. अथवा प्रमत्तादि समस्त मुनियों का अहिंसादि रूप प्राचार है. वह समाचार है, अथवा सब क्षेत्रों में हानिवृद्धि रहित कायोत्सर्गादिक सदृश परिणाम रूप प्राचरण है वह समाचार है । सम्यक् प्राचरण के प्रकार--- एषः संक्षेपविस्तार द्विभेदो दशभेदपः । संक्षेपोऽनल्पभेवोऽन्य आदिभेवा इमे दशः ।।६०५॥ समाचार अर्थात् सम्यक् प्राचरण दो ही प्रकार के हैं-१. औधिक २. पदविभागिक । प्रौधिक के दश भेद होते हैं और पदविभागिक समाचार अनेक प्रकार का है। प्रौधिक समाचार के भेद--- इच्छामिथ्या तथा कारेच्छा वृत्यासी निषिद्धिकः । . प्राप्रच्छन्न प्रतिप्रश्नश्च निमंत्रण. संभयो ।६०६॥ इच्छाकार, मिथ्याकार, तथाकार, इच्छावृत्ति, आशिका, निषिद्धिका, आपृच्छा, प्रतिपृच्छा, सनिमंत्रणा और संश्रय इस तरह ते औधिक समाचार के दश भेद हैं ।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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