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[ मो. प्र. चिन्तामखि
पूर्वगत के भेद और लक्षण
यद्यपि पूर्वगत की स्तुति कर चुके हैं, तथापि उसके अनेक भेद हैं, इसलिये न सब भेदों को कहते हुए उस पूर्वगत की फिर भी स्तुति करते हैं । पूर्वगतं तु चतुवंश, चोदितमुत्पाद पूर्व माद्यमहम् । aureated, पुरुवीर्यानुप्रवादं # ॥८५॥ संततमहमभिवंदे, तथास्तितास्ति प्रवादं पूर्व च ।
ज्ञान प्रवाद सत्य, प्रवाद मात्म प्रवादं च ॥ ६८६ ॥ कर्म प्रवाद मीडेऽथ, प्रत्याख्यान नामधेयं च । दशमं विधाधारं, पृथुविद्यानुपवादं च ८८७ कल्याण नामधेयं प्रारणांवायं क्रियाविशालं च । श्रथलोक विदुसार बंदे लोकाय सारपदं ॥८८॥
पूर्वगत के चौदह भेद हैं, उनके नाम ये हैं- १. उत्पाद पूर्व, २. ग्रायणीय
पूर्व, ३. वीagare पूर्व ४. अस्ति नास्ति प्रवाद पूर्व ५. ज्ञानप्रवाद पूर्व, ६. सत्यप्रवाद पूर्व, ७. ग्रात्मप्रवाद पूर्व, ८. कर्मप्रवाद पूर्व प्रत्याख्यान पूर्व १०. विद्यानुवाद पूर्व ११. कल्याणवाद १२. प्राणानुवाद पूर्व १३ क्रिया विशाल १४. लोक बिंदुसार । १. उत्पाद पूर्व -- इसमें जीवादिक पदार्थों के उत्पाद, व्यय, धौव्य रूप धर्मो का वर्णन है । इसको पद संख्या १ करोड़ है ।
२. श्राग्रायणीय पूर्व सुनय और द्रव्यों का वर्णन है।
इसमें प्रधान व मुख्य पदार्थों का निरूपण हैं । दुर्नय इसकी पद संख्या छियानवे लाख है ।
३. वीर्यानुवाद -- इसमें चक्रवती, इन्द्र, धरणेन्द्र, केवली आदि को सामर्थ्य
का महात्म्य दिखलाया है। इनकी पद संख्या सत्तर लाख है ।
४. अस्ति नास्ति प्रवाद -
- इसमें श्रनेक प्रकार से छहों द्रव्यों के अस्तित्व और नास्तित्व आदि धर्मो का वर्णन है । इसकी पद संख्या साठ लाख है ।
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५. ज्ञान प्रवाद--- इसमें पांचों ज्ञानो का तथा तीनों मिथ्या ज्ञानों के स्वरूप है। उसके प्रगट होने के कारण उनके प्राधार वा पात्र | जिनके वह ज्ञान होता है ] आदि का वर्णन है । उसके पद संख्या विन्यानवे हजार नौ सी नित्यानवे है ।