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________________ अध्याय : पांचवां ] .. ......:. प्रतिक्रमण मूल गुरग का स्वरूप--- दवे खेत्ते काले मावे या कया बराह सोहरण्यं । रिंगदरणगर हए जुत्तो मरण वचिकायेण पडिकमणं ॥६८४।। द्रव्य-शरीर और ग्राहारादिक पदार्थ । क्षेत्र-वसतिका, तृणादिक फलक, चटाई और गमवादि क्रियामागं । काल-~-प्रातः काल, मध्यान्ह, दिवस, रात्रि, पक्ष, महिना, वर्ष, भूत, वर्तमान, भविष्यादि काल । भाव-मन की अनेक प्रकार की परिणति । इनके पाश्रय से जो दोष उत्पन्न होते हैं अर्थात् अहिसादि व्रतों में जो चारादि दोन उत्पन्न होते हैं, उनका नाश करना प्रतिक्रमण है । निंदा और गहींपूर्वक प्रतिक्रमण विधि करना चाहिये । स्वसाक्षिक दोषों का उच्चार करना वह निदा अथवा निंदन है और प्राचार्यादिक के सन्निधि में किये हुए दोपों का पालोचना पूर्वक वर्णन करना गहरे अथवा गहरा है। शुभ मन, शुभ व वन और शुभ शरीर की प्रवृत्ति के द्वारा प्रतिक्रमण करें अर्थात् अशुभ मन, वचन और काय के द्वारा किये हुए अशुभ योग से निवृत्त होना अर्थात् अशुभ परिणाम से उत्पन्न हुए ----किये गये दोषों का त्याग करना यह प्रतिक्रमण है। सारांश ----निदा गर्हायुक्त होकर मन, वचन में शरीर के द्वारा द्रव्य, क्षेत्र और भाव के विषय में किये हुये जो प्रत दोष उनका शोधन-त्याग करना मह प्रतिक्रमण है। . प्रत्याख्यान मूलमुरण का स्वरूप--- रणामादीणं छह अजोग परिवज्जरां तियरणेण । . पच्चक्रवाणं गयं प्रणामयं चागमे काले ॥६८५॥ समीप के भविष्यकाल में अर्थात् नजदीक के मुहूर्त, दिबस, सप्ताह इत्यादिक . भविष्यकाल में नाम, स्थापना, द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव ऐसे अनागत छहों दोषों का त्याग करना तथा प्रागत उपस्थित नामादिक छहीं दोषों का त्याग करना प्रत्याख्यान मुलगुग है । अथवा दूर के भविष्य काल में अथवा समीप के भविष्य काल में अयोग्य ऐको छहों नामादिक दोषों का त्याग करना प्रत्याख्यान है । अथवा अनागत काल में नामादिक अयोग्य छहों प्रकार का जो वागमन होगा उसका मन बचन शरीर से त्याग करना प्रत्याख्यान है। पाप के कारण भूत ऐसे नाम स्थापनादिकों का त्याग करना प्रत्याख्यान है । . . प्रतिक्रमणा और प्रत्याख्यान में अन्तर-अतीत काल में-भूतकाल में उत्पन्म .. p
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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