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________________ प्रकाशकीय N ve - - - : . CAR ... भारत वर्ष में बिहार प्रांत की भूमि सर्व श्रेष्ठ पावन पवित्र भूमि है, क्योंकि यहां पर हमारे २४वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने जन्म लिया और २२ तीर्थकर अनेक भव्यात्माओं के साथ मोक्ष पधारें। इसी प्रांत में स्थित प्रारा नगर में महान तपोनिधि स्याद्वाद केशरी, वात्सल्य रत्नाकर, श्रमरा रत्न श्री १०८ गगांधराचार्य कुंथसागरजी महाराज व उनके विशाल संघ सानिध्य में यह पंच कल्याणक महीं. त्सव विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न हो रहा है। . - मुझे हार्दिक प्रसन्नता है कि ऐसे शुभावसर पर "श्री दि. जै. कुंथु विजय ग्रन्थमाला समिति" जयपुर (राज.) द्वारा १३वे पुष्प के रूप में प्रकाशित "श्री गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामरिण" ग्रंथ का विमोचन परम पूज्य श्री १०८ गभराचार्य कुंथुसागरजी महाराज के करकमलों द्वारा करवाने का परम सौभाग्य प्राप्त हो रहा है।... ... श्री गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामणि ग्रंथ एक गागर में सागर के समान ग्रंथराज है । इस. अन्य राज में लगभग. ४० मूलभूत ग्रन्थों को लक्ष्य में रखकर २,१७८ श्लोकों में संग्रह किया गया है। इसका संग्रह परम पूज्य श्री १०८ गणधराचार्य कथसागरजी महाराज ने अपने बाहुबलि वर्षायोग के समय · वहुत ही कठिन परिश्रम से वर्ष १९८१ में किया था।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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