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________________ FROM का सार प्रस्तुत ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया है, जिससे बहुत कम समय में समस्त जिनवाणी का संक्षिप्त सार ज्ञात हो सकता है। 'गोम्मट प्रश्नोत्तर चिन्तामणि' नामक इस ग्रन्थ में अनेक महत्त्वपूर्ण. ग्रन्थों का सार समाहित हुअा है । इन ग्रन्थों में 'गोम्भटसार' त्रिलोकसार', 'मूलाचार', 'ज्ञानार्णव', 'समयसार', प्रवचनसार', • 'नियमसार', 'रत्नकरंड श्रावकाचार', 'तत्त्वार्थसूत्र', 'अाचारसार', 'राजवार्तिक', 'परमात्मप्रकाश', 'पुरुषार्थसिद्धियुपाय', 'मोक्षमार्गप्रकाशक' आदि महत्वपूर्ण हैं । - इस महत्वपूर्ण ग्रन्थ का प्रकाशन. श्री दिगम्बर जैन कुन्थु ..विजय ग्रन्थ माला समिति की ओर से १३३. पुरण के रूप में किया ....... - जा रहा है । यह ग्रन्थ श्रावको एवं साधुवों दोनों के लिए ही लाभ दायक बन गया है। ........ ग्रन्थ के मुद्रण व प्रकाशन व्यवस्था के प्रमुख स्तम्भ ग्रन्थमाला. के प्रकाशन संयोजक :श्री शांतिकुमारजी गंगवाल को अपना धन्यवाद ज्ञापित करता है। इस ग्रन्थमाला के मुख्य प्रेरणा स्तम्भ परम पूज्य श्री १०८ गए धराचार्य स्याद्वादकेशरी, श्रमरणरत्न, वात्सल्य रत्नाकर कुन्थुनागर जी महाराज एवं श्री १०५ गणिनी प्रायिका सिद्धान्त विशारद, सम्यग्ज्ञान शिरोमणि विदुपीरत्न जिनधर्म प्रचारिका विजयामती माताजी के पावन चरणों में मेरा शत शत 'नमोस्तु अपित करता हूँ। डॉ० दामोदर शास्त्री प्राचार्य (राडर) एवं अध्यक्ष : (जैन दर्शन विभाग) :. श्री.ला. या शास्त्री केन्द्रिय संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली Magne sianamainainamama
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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