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________________ २०२ ] व्यानों का वर्णन - श्रनादि विभ्रमारमोहादभ्यासाद जात [ गो. प्र. चिन्तामणि संग्रहात् । मप्यात्मन रत्तत्वं प्रस्खलत्येव योगिनः ॥ १६३॥ योगी ( मुनि ) ग्रात्मा के स्वरूप को यथार्थ जानता हुआ भी अनादि विभ्रम की वासना के तथा मोह के उदय से तथा विना अभ्यास ले और उस तत्त्व के संग्रह के अभाव भारी से च्युत हो जाता है अर्थात् मुनि भी तत्व स्वरूप से चलायमान हो जाता है । श्रविद्या वासना बेस विशेष विवशात्मनाम् । योन्यमान मपि स्वास्मिन् चत्तः कुरुते स्थितिम् ॥ १६४ ॥ तथा आत्मा के स्वरूप को यथार्थ जान कर अपने में जोड़ता हुआ. भी अर्थात् ध्यान में एकाग्र होता हुआ भी ग्रविद्या की वासना के वेग से विशेषतया face है ग्रात्मा जिनका उनका चित स्थिरता को धारण नहीं करता । साक्षारकर्मतः क्षिप्रं विश्वतत्वं यथास्थितम् । विशुद्धि चारमन: शश्वद्वस्तुधर्मे स्थिरी भवत् १ ९६५ ।। इस प्रकार पूर्वोक्त ध्यान के विघ्न के कारण दूर करने के लिये तथा समस्त वस्तुनों के स्वरूप का यथास्थितं तत्काल साक्षात् करने के लिये तथा आत्मा की विशुद्धता करने के लिये निरन्तर वस्तु के धर्म में स्थिरीभूत होवे । भावार्थ-ध्येय में एकाग्र मनका लगना ध्यान है, उसमें विघ्न के पूर्वोक्त कारण हैं । इनको दूर के लिये समस्त वस्तु का यथार्थ स्वरूप निश्चय करके संशयादिक रहित वस्तु के धर्म में ठहरें | यह धर्म ध्यान की सिद्धि का उपाय है सो विशेषता कहते हैं । लक्ष्यं लक्ष्यसंघात स्थूलात्सूक्ष्नं विचिन्तयेत् । सालस्वाञ्च निरालम्बं तस्व वित्तत्व मञ्जसा ।।१६६|| तत्त्वज्ञानी इस प्रकार तत्त्व को प्रकटतया चितवन करें कि लक्ष्य के.. ( जो अपने लखने में वे उसके ) सम्बन्ध से तो लक्ष्य को ( जो अनुभव गोचर नहीं उसको) चितवन करें और स्थूल इन्द्रिय गोवर पदार्थ से सूक्ष्म इन्द्रियों के अगोचर पदार्थों का चितवन करें इसी प्रकार सालम्ब कहिये किसी ध्येय का बालंबन लेकर उससे निरालम्ब वस्तु स्वरूप से तन्मय होना चाहिये । भावार्थ- दृष्ट पदार्थ के सम्बन्ध से अदृष्ट का ध्यान करना कहा गया है, यहां प्रकरण में परमात्मा का ध्यान
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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