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श्री कन्थ-विजय ग्रन्थमाला
[ रचयिता-बिहारीलाल मोदी शास्त्री.] - श्री कुन्थुविजय ग्रंथमाला ने अब तक, ग्रंथ प्रकाशित किये विशाल ।
द्वादश अनुपम पुष्पों से, ग्रन्थित कीनी उत्तम माल ।। साहित्य प्रकाशन के जग में, हुमा समुन्नत इसका भाल ।
अत्यल्प समय में इसने दिये विश्व को अनुपम लाल !! प्रथम पुष्प लघुविद्यानुवाद है, वरिणत यन्त्रतन्त्र अरु मन्त्र । . दुतिय चतुर्विशति तीर्थकर, विधी अनाहत मन्त्ररु यन्त्र ।। तजो मान करो ध्यान तोसरा, विधि सिखाता धरना ध्यान ! हुम्बज श्रममा सिद्धान्त पाठावलि, प्रातः पठन करे. कल्याण ।।२।। पुनर्मिलन में सती अंजना, अरु पवनञ्जय का आख्यान । प्रतिदिन पूजन . करते प्राणी, पूजा सीतलनाथ. विधान ।।
वर्षायोग स्मारिका जयपुर, · रहा अनोखा वर्षायोग । श्री सो शिर मालाम्य को पढ़कर, क्रम से मिटता भव का रोग ।।३।।
कथा रात्रि भोजन त्याग की, सुरभित करता नवमा फूल । .. दशम पुष्प को पढ़कर प्राणी, पा जाता है भव का कूल ।।. भैरव पद्मावती कल्प एकादश, तन्त्र मन्त्र सम्बन्धी ग्रन्थ । . सच्चा कवच कहानी सन्ग्रह, बतलाता है सचा. पंथ 11४1 • गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामगि, तेरहवाँ यह ग्रंथ महान् । सार सैकड़ों ग्रंथों का गुम्फित कीना प्राचार्य सुजान ।। ... चारों - अनुयोगों का अनुपग, भरा हुआ है इसमें सार । इसका अध्ययन करके प्राणी, कर सकताः प्रातम उद्धार ।।५।। श्री शान्तिकुमार के संयोजन में मिली सफलता इसको प्राज। निष्ठा लगन और श्रम उनका, शीघ्र सफल करता सब काज ।।. ज्ञान ज्योति यह जले भरखा गिडत, मिथ्यातम का करै विनाश । . करें कामना लाल बिहारी, अखिल विश्व में करै प्रकाश ।।६।।
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