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________________ REC... अध्याय : पांचवां ] [ १४१ हैं। इनके सेवन करने से उन जीवों का घात होता है। इसी प्रकार मद्य भी नस हिंसा का कारण है । साथ ही उसके सेवन से हिताहित का विवेक भी नष्ट हो जाता है। अतः वह भी धावक के द्वारा जीवन पर्यन्त के लिए छोड़ने योग्य है ।। प्रश्न :-और भी त्यागने योग्य पदार्थ कौन से हैं ? . उत्तर :--अल्प फल और बहुत स जीवों का विघात होने से मूली, गीला अदरक, मकवन, नीम के फूल और केतकी-केवड़ा के फूल तथा इसी प्रकार के अन्य पदार्थ भी श्रावक के द्वारा छोड़ने के योग्य हैं। अल्पफल. बहुविधातामूलकमारिग शृंगवेरारिए । नवनीत निम्ब कुसुमं कैतक मित्येवमबहेयम् ।।७। मूली, गीला अर्थात् विना सूखा अदरक, उपलक्षरण से बालू, घुइयां, गाजर, शकरकंद आदि मयखन, नीम के फूल, उपलक्षण से सभी प्रकार के फूल तथा केतकी के फूल और इसी प्रकार के अन्य पदार्थ भी अल्पफल और बहुत जीवों का घात होने से छोड़ने के योग्य हैं। - विशेषार्थ :-जिन बस्तुनों के खाने में बस जीवों का धात होता है, वे तो त्याज्य हैं ही। परन्तु जिनमें अनन्त स्थावर कायों का घात होता हैं ऐसो मूली तथा गीली अदरक, घुइयाँ आदि भी त्याज्य हैं। अङ्गुल के असंख्यातवें भाग बराबर अवगाहना के धारक एक निगोद जीव के शरीर में सिहों तथा समस्त भूतकाल के अनन्त गुरिगत जीवों का निवास है । जिह्वा इन्द्रिय सम्बन्धी अल्प सुख के लिए इन सब जीवों का विधात हो जाता है । दूध या दही को मथकर निकाला हुआ मक्खन नवनीत कहलाता है। इसमें अन्तम हत के पश्चात् असंख्य स जीवं उत्पन्न हो जाते हैं । इसी प्रकार नीम आदि फूल में भी इस जीवों के निवास स्थान हैं। केतकी-केवड़ा आदि के फूलों में भी चलते-फिरते अस जीव दिखाई देते हैं । अतः उन फूलों में सुवासित किये हुए कत्था मादि पदार्थ भी श्रावकों के द्वारा छोड़ने योग्य हैं। प्रश्न :- जो पदार्थ प्रासुफ होने पर भी अनिष्ट और अनुपसेव्य हैं, तो उन्हें क्यों छोड़े? ___उत्तर :-वशोकि जो वस्तु अनिष्ट-अहितकर हो उसे छोड़े और जो सेवन करने
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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