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________________ श्री १०५ क्षुल्लक चैत्य सागरजी महाराज :485 S R SANE ... ... का (मंगलमय शुभाशीर्वाद) " मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि श्री दिगम्बर जैन कुन्थु विजय' ग्रंथमाला समिति जयपुर ( राजस्थान.) से परम पूज्य श्री १०८ गाधराचार्य कुन्थुसागर जी महाराज द्वारा संग्रहित श्री गोम्मट. . प्रश्नोत्तर चिंतामरिण ग्रंथ का प्रकाशन हो रहा है । इस ग्रंथ में गणधराचार्य महाराज ने अनेक ग्रंथों के माध्यम से अनेक सैद्धान्तिक. विषयों का संकलन किया है। जिससे यह ग्रंथ साधुवर्ग एवं समाज के . . . मुमुक्षुओं के लिये बहुत ही उपयोगी सिद्ध होगा। इस ग्रंथमाला से । अब तक १२ पुष्प प्रकाशित हो चुके हैं, यह १३वां पुष्प हैं। जितने ग्रन्थ इस ग्रन्थमाला से प्रकाशित हुए हैं। वे साधुवर्ग एवं सभी के .लिए बहुत ही उपयोगी हैं। . ग्रन्थ प्रकाशन कार्यों में ग्रन्थमाला के प्रकाशन संयोजक श्री शांति कुमार जी गंगवाल बहुत ही परिश्रम करते हैं उनके अथक परिश्रम । से यह ग्रन्थमाला सुचारु रूप से चल रही है। मेरी गणधराचार्य महाराज से प्रार्थना है कि ग्रन्थमाला से इसी प्रकार ग्रन्थ प्रकाशित करवाते रहे और इसी शुभकामना के साथ ग्रन्धमाला के प्रकाशन संयोजकजी को व उनके सभी सहयोगियों को मेरा आशीर्वाद हैं। . --क्षुल्लक चत्य सागर म free . .. ..
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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