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[ गो. प्र. चिन्तामणि
प्रश्न ..द्रव्य निक्षेप किसको कहते हैं ? उत्तर :---भूत और भविष्यत् पर्याय की मुग्यता लेकर वर्तमान में कहना द्रध्यनिक्षेप
है । जैसे इन्द्र की मूर्ति बनाने के लिये जो पापागा या काष्ठ लाया गया हो,
उसे इन्द्र कहना । या मुनीमी छोड़ देने पर भी किसी को मुनीम कहना? प्रश्न :--भावनिक्षेप किसको कहते हैं ? उत्तर :---वर्तमान पर्याय युक्त वस्तु को भावनिक्षेप कहते हैं। जैसे - देवों के स्वामी साक्षात् इन्द्र को इन्द्र कहना।
। प्रश्न :--देशविरत गुरणस्थान का क्या स्वरूप है? उत्तर :-प्रत्याख्यानाबरण क्रोध, मान, माया, लोभ के उदय से संबमभाव रहित,
किन्तु अप्रत्याख्यानावररण क्रोध, मान, माया, लोभ के उपशम से श्रावक के व्रतरूप देश चारित्र सहित परिणाम को देश विरत नामक पंचम गुणस्थान । कहते हैं । चतुर्थ श्चम प्राविकार के समस्त मुगास्थानों में सम्यग्दर्शन
और सम्यग्दर्शन का अविनाभावी सम्यगजान अवश्य होता है । इसके बिना पंचम और षष्ठ प्रादि गुणास्थान नहीं होते हैं । प्रथम तो चतुर्थ गुगणस्थान । में ही, अष्ट मूलगुणों का धारण, सप्त व्यसन का त्याग, रात्री भोजन का । त्याग, अन्याय अभक्ष का त्याग होता है । किन्तु व्रतरूप संयम तो पंचमः । गुणस्थान देश चारित्र में ही होता है। इसीलिये इस गुरास्थान का नाम देश चारित्र है।
नोट :---इस गुगास्थान में चारित्र का यांशिक पारम्भ देखा जाता है। हमनें
चारित्र अधिकार अलग से बनाया है, जो क्रमश: पठनीय है। ...
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