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अध्याय : चौथा ]
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उत्तर :--वस्तु के एक देश को जानने वाले ज्ञान को नय कहते हैं। .. प्रश्न :--नय के कितने भेद हैं ? उत्तर :-दो हैं, एक निश्चय नय, दूसरा व्यवहार नय अथवा उपनय । प्रश्न :-निश्चय-नय किसको कहते हैं ? उत्तर :---वस्तु के किसी असली अंश को ग्रहण करने वाले ज्ञान को निश्चय नय
कहते हैं। जैसे - मिट्टी के घड़े को मिट्टी का घड़ा कहना । प्रश्न :-व्यवहार-नय किसको कहते हैं ? उत्तर :--किसी निमित के वश से एक पदार्थ को दूसरे. पदार्थ रूप जानने वाले ज्ञान . को व्यवहार नय कहते हैं । जैसे मिट्टी के घड़े को घी का घड़ा कहना । प्रश्न :----निक्षेप किसको कहते हैं ? उत्तर :-..-युक्ति करके सूयुक्त मार्ग होते हुए कार्य के वश से नाम, स्थापना, द्रव्य और
भाव में पदार्थ के स्थापन को निक्षेप कहते हैं । .. प्रश्न :--निक्षेप के कितने भेद हैं ? उत्तर :--नाम निक्षेप, स्थापना निक्षेप, द्रव्य निक्षेप और भाव निक्षेप ।
नामस्थापनाद्रव्यभावतस्तन्न्यासः ।।५।।३०। मोक्षशास्त्र, अध्याय १ प्रश्न ---नाम निक्षेप किसको कहते हैं ? उत्तर :---गुण, जाति, द्रव्य और क्रिया की अपेक्षा के विना लोक व्यवहार के लिये
किसी का कोई नाम रखने को नाम निक्षेप कहते हैं । जैसे - किसी मातापिता ने अपने पुत्र का नाम 'इन्द्र' रखा । किन्तु उस पुत्र में इन्द्र का कोई गुरग नहीं होता । अतः वह पुत्र नाममात्र से इन्द्र है, वास्तव में इन्द्र नहीं । स्थापना निक्षेप - धातु, काष्ठ, पाषाण आदि के चित्र या मूर्ति तथा अन्य पदार्थ में 'यह वह है' इस प्रकार कल्पना करना स्थापना निक्षेप है । स्थापना दो प्रकार की होती है । तदाकार और अतदाकार ! उसी प्राकार काले में उसी नाकार वाले की कल्पना करना तदाकार स्थापना कहलाती है। जैसे - इन्द्राकार मूर्ति में इन्द्र की कल्पना करना । भिन्न आकार वाले पदार्थ में भिन्न आकार वाले की कल्पना करना अतदाकार स्थापना कहलाती है । जैसे – सतरंज की गोटी । (मोहर) में बादशाह और वजीर बगैरह की कल्पना करना।
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