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________________ १०२ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि करता है । जैसे - दार (पु.), भार्या (स्त्री), कलत्र (पु.) ये तीनों गब्दः भिन्न लिंग वाले होकर भी एक ही स्त्री का वामक है परन्तु यह नय। स्त्री पदार्थ को लिंग के भेद से तीन भेदरूप मानता है । प्रश्न :-समभिरूढ-नय किसको कहते हैं ? उत्तर :--जो नय नाना अर्थों का उल्लंघन कर रूढि से एक अर्थ को ग्रहण करता है, उसे समभिरूढ नय कहते हैं । यह नय पर्याय के भेद से अर्थ को भी भेदरूप ग्रहण करता है जैसे - इन्द्र, शक्रा, पुरन्दर ये तीनों शब्द, इन्द्र के नाम हैं, परन्तु यह नय इन तीनों के भिन्न-भिन्न अर्थ ग्रहण करता है। ... प्रश्न :-एवम्भूत-नय किसको कहते हैं ? उत्तर :--जिस शब्द का जिस क्रियारूप अर्थ है, उसी क्रियारूप परिणमे हुये पदार्थ को .. जो नय ग्रहण करता है, उसे एवम्भूत नय कहते हैं। जैसे - पुजारी को पूजा करते समय ही पूजारो कहना। इन नयों का विषय उत्तरोत्तर सूक्ष्म सूक्ष्म होता जाता है । ये नय परस्पर सापेक्ष होते हैं, निरपेक्ष नय मिथ्याः ।। माने जाते हैं। प्रश्न :-व्यवहार-नय उपनय के कितने भेद हैं ? उत्तर : -सद्भूत व्यवहार नय, असद्भुत व्यवहार नय और उपचरित व्यवहार नयः । अथवा उपचरितासद्भुत व्यवहार नय । प्रश्न :- सद्भूत व्यवहार-नय किसको कहते हैं ? उत्तर :-एक अखंड़ द्रव्य को भेदरूप विषय करने वाले ज्ञान को सद्भूत व्यवहार नयः । कहते हैं। जैसे - जीन के केवल ज्ञानादिक या मति ज्ञानादिक गुगा । प्रश्न :--असद्भूत व्यवहार-नय किसे कहते हैं ? उत्तर :-जो मिले हुए भिन्न पदार्थों को अभेदरूप ग्रहण करता है । जैसे - यह शरीर __ मेरा है अथवा मिट्टी के घड़े को घी का घड़ा कहना । ... प्रश्न :-उपचरित व्यवहार-नय अथवा उपचरित असद्भूत व्यवहार-नय किसको । __ कहते हैं ? · : उत्तर :...-अत्यन्त भिन्न पदार्थों को जो भेदरूप ग्रहण करता है। जैसे - हाथी, घोडा, . महल, मकान मेरे हैं इत्यादि।. . प्रश्न :-जय किसको कहते हैं ? BAR
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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