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________________ १०० ] [ गो. प्र. चिन्तामगि उत्तर :-पक्ष और साधन में दृष्टान्त की सदृशता दिखाने को उपनय कहते हैं । . . जी. -- यह पर्वत भी वैसा ही धूमवान् है । प्रश्न :--निगमन किसको कहते हैं ? : उत्तर :-नतीजा निकालकर प्रतिज्ञा के दोहराने को निगमन कहते हैं । जैसे इसलिये यह पर्वत भी अग्निमान हैं । प्रश्न :--हेतु के कितने भेद हैं ? . उतर:-केवलान्वयी, केवलव्यतिरेकी और अन्वयव्यतिरेकी। प्रश्न ::-- केवलान्वयी हेतु किसको कहते हैं ? उत्तर :--जिस हेतु में सिर्फ अन्वय दृष्टान्त होता है । जैसे-जीव अनेकान्त स्वरूप . . . है, क्योंकि सत्स्वरूप है। जो-जो सत्स्वरूप होता है, वह अनेकान्त स्वरूप होता है । जैसे—पुद्गलादिक । . . . प्रश्न :--विलव्यतिरेकी हेतु किसको कहते हैं ? उत्तर :-जिसमें सिर्फ व्यतिरेक दृष्टान्त पाया जाता है। जैसे---जिन्दे शरीर में __ आत्मा है । क्योंकि इसमें श्वासोच्छवास है। जहां-जहां प्रात्मा नहीं होता, वहां-वहां श्वासोच्छवास भी नहीं होता । जैसे - चौकी वगैरह । प्रश्न :---अन्वय व्यतिरेको हेतु किसको कहते हैं ? . उत्तर :-- जिसमें अन्वय दृष्टान्त और व्यतिरेक दृष्टान्त दोनों होते हैं । जैसे- पर्वत में अग्नि है । क्योंकि इसमें धूम है। जहां-जहां धूम है, वहां-वहां अग्नि होती है । जैसे- रसोई का घर । जहां-जहां अग्नि नहीं होती, वहां-वहां धूम भी नहीं होता । जैसे--तालाब । प्रश्न :---पागम प्रमाण किसको कहते हैं ? उत्तर :--प्राप्त के बचन आदि से उत्पन्न हुए पदार्थ के ज्ञान को आगमप्रमार प्रश्न :--नयके मुख्य रूप से कितने भेद हैं ? उत्तर :-दो भेद हैं, 'द्रव्याथिकनय और पर्यायाथिक नय। . प्रश्न :---द्रव्यायाथिक नय किसका कहते हैं ? . उत्तर :- जो नय द्रव्य अर्थात सामान्य को ग्रहण करता है। प्रश्न :---द्रव्यायाथिकनय के कितने भेद हैं ? ... . । -
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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