________________
६५ ]
उत्तर :
[ गो. प्र. चिन्तामणि..
- जहाँ साध्य के प्रभाव (गैर मौजूदगी ) का निश्चय हो । जैसे—अग्नि से तपा हुवा लोहे का गोला |
प्रश्न :- - श्रकिञ्चितकर हेत्वाभास किसे कहते हैं ?
उत्तर :--
-जो हेतु कुछ भी कार्य ( साध्य की सिद्धि ) करने में समर्थ नहीं होता ।
प्रश्न :- किञ्चितकर हेत्वाभास के कितने भेद हैं ?
: उत्तर :- दो हैं --- एक सिद्ध साधन, दूसरा बाधित विषय ।
प्रश्न :- सिद्ध साधन किसको कहते हैं ?
उत्तर :- जिस हेतु का साध्य सिद्ध हो। जैसे- अग्नि गर्म है, क्योंकि स्पर्शन इन्द्रिय से
ऐसा ही प्रतीत होता है ।
प्रश्न :
www
- बाधित विषय हेत्वाभास किसको कहते हैं ?
उत्तर :- जिस हेतु के साव्य में दूसरे प्रमाण से बाधा आवे ।
प्रश्न :- - बाधित विषय हेत्वाभास के कितने भेद हैं ?
उत्तर :- प्रत्यक्ष बाधित, अनुमान बाधित, ग्रागम बाधित, स्ववचन बाधित ग्रादि: अनेक भेद हैं ।
प्रश्न :- प्रत्यक्ष बाधित किसको कहते हैं ?
उत्तर :- जिस हेतु के साध्य में प्रत्यक्ष से बाधा आती है, जैसे 'अग्नि दण्डी है, क्योंकि यह द्रव्य है' तो यह हेतु प्रत्यक्ष बाधित है ।
प्रश्न : अनुमान बाधित किसको कहते हैं ?
उत्तर :- जिस हेतु के साध्य में अनुमान से बावा श्राती है, जैसे घास आदि कर्ता के बनाये हुवे हैं, क्योंकि ये कार्य हैं। परन्तु इसमें इस अनुमान से बाबा थाती है कि पास यदि किसी की बनाई हुई नहीं है, क्योंकि इनका बताने वाला शरीरधारी हैं । जो-जो शरीरधारी की बनाई हुई नहीं हैं, वे वे वस्तुएँ कर्ता की बनाई हुई नहीं हैं, जैसे -- श्राकाश ।
प्रश्न :- ग्रागम बाधित किसको कहते हैं ।
उत्तर :- शास्त्र से जिसका साध्य बाधित होता है, उसे श्रागम बाचित कहते हैं । जैसेपाप सुख को देने वाला है, क्योंकि यह कर्म है । जो जो कर्म होते हैं, वे वे सुख देने वाले होते हैं, जैसे--- पुण्यकर्म । इसमें शास्त्र से बाबा आती हैं क्योंकि शास्त्र में पाप की दुःख देने वाला लिखा है ।