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________________ RAA अध्याय : चौथा ] प्रश्न :-हेत्वाभास (साधनाभास) किसे कहते हैं ? उत्तर :--सदोष हेतु को हेत्वाभास कहते हैं । प्रश्न :-हेत्वाभास के कितने भेद हैं ? उत्तर :-हेत्वाभास के चार भेद हैं-प्रसिद्ध, विरुद्ध, अनैकान्तिक (व्यभिचारी) ... और अकिञ्चितकर। प्रश्न :--प्रसिद्ध हेत्वाभाव किसे कहते हैं ? उत्तर :-जिस हेतु के अभाव (गैर मौजूदगी) का निश्चय होता है अथवा जिसके सद्भाव में (मौजूदगी में) संदेन्द्र (क) होता है, उसे गसिद्ध हेत्वाभास कहते हैं । जैसे "शब्द नित्य हैं, क्योंकि नेत्र का विषय है ।" परन्तु शब्द कर्ण का विषय है, नेत्र का नहीं हो सकता इस कारण "नेत्र का विषय" यह हेतु असिद्ध हेत्वाभास है। प्रश्न :-विरुद्ध हेत्वाभास किसे कहते हैं ? .. उत्तर :--साध्य से विरुद्ध पदार्थ के साथ जिसकी व्याप्ति होती है, उसे विरुद्ध हेत्वा भास कहते हैं । जैसे 'शब्द नित्य है, क्योंकि - परिगामी है इस अनुमान में परिगामी की व्याप्ति अनित्य के साथ है, नित्य के साथ नहीं है । इसलिये नित्यत्व का परिणामी हेलु' विरुद्ध हेत्याभास है। :-अनेकान्तिक (व्यभिचारी) हेत्वाभास किसे कहते हैं ? उत्तर :—जो हेतु पक्ष, सपक्ष, विपक्ष इन तीनों में व्यापता है, उसको अनैकान्तिक हेत्वाभास कहते हैं । जैसे---इस कोठे में धूम हैं, क्योंकि इसमें अग्नि है। यहाँ अग्नि हेतु पक्ष, सपक्ष, विपक्ष तीनों में व्याप्त होने से अनेकान्तिक हेत्वाभास है। प्रश्न :—पक्ष किसको कहते हैं। उत्तर :--जहाँ साध्य के रहने का शक होता है । जैसे ऊपर के दृष्टान्त में कोठा । . प्रश्न :-सपक्ष किसको कहते हैं ? उत्तर :- जहाँ साध्य के सद्भाव (मौजूदगी) का निश्चय होता है । जैसे-धूम का - सपक्ष गीले (ईंधन) से मिली हुई अग्निवाला रसोई घर । प्रश्न :---विपक्ष किसको कहते हैं ?
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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