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। अध्याय : दूसरा ]
को सर्वथा अजीब समझ लिया जाय, क्योंकि ऐसा समझने से बस्तु ताव का सही . निर्णय नहीं हो पाता और सही निर्णय के अभाव में प्रात्मा मोक्ष को प्राप्त नहीं .. हो पाता। जिन भावों को यह जीव. मोक्ष का कारण मानकर करता है, वे भाव पुण्यास्त्रब के कारण होकर इस जीव को देवादिगतियों में सागरों पर्यन्त के लिये रोक लेते हैं । सात तत्वों में जीव और अजीव का जो संयोग है, वह संसार है तथा प्रास्त्रब और बन्ध उसके कारण है, जीव और अजीव का जो वियोग-पृथग्भाव है, वह मोक्ष है तथा संवर और निर्जरा उसके कारगा हैं।
. जिस प्रकार रोगी मनुष्य को रोग, उसके कारण, रोग मुक्ति और उसके कारण चारों का जानना अावश्यक है। उसी प्रकार इस जीव को संसार, उसके
कारण, उससे मुक्ति और उसके कारण - चारों का जानना आवश्यक है। काम करणानुयोग में मिथ्यात्व, सम्यक्त्व मिश्यात्व, सम्यवत्व प्रकृति और
अनन्तीसुधको प्रोमा मामाजोन इन पास हसियों के उपशम, क्षयोपशम अथवा क्षय से होने वाली श्रद्धा गुण को स्वाभाविक परिणति को सम्यग्दर्शन कहा है। 'करंगानुयोग के इस सम्यग्दर्शन के होने पर चरणानुयोग, प्रथमानुयोग और द्रव्यानुयोग में प्रतिपादित सम्यग्दर्शन नियम से हो जाता है । ..परन्तु शेष अनुयोगों के सम्यग्दर्शन
होने पर कररमानुयोग प्रतिपादित सम्यग्दर्शन होता भी है और नहीं भी होता है। - मिथ्यात्व प्रकृति के अवान्तर भेद असंख्यात लोक प्रमाण होते हैं। एक मिथ्यात्व
प्रकृति के उदय में सातवें नरक की आयु का बन्ध होता है। और एक मिथ्यात्व प्रकृति के उदय में नौवें अवेयक की आयु का बन्ध होता है और एक मिथ्यात्व प्रकृति के उदय
में इस जीव के मुनि हत्या का भाव होता है और एक मिथ्यात्व प्रकृति के उदय में . को स्वयं मुनित्रत धारण करके अट्ठाईस मूलगुणों को निर्दोद पालन करता है । एक
मिथ्यात्व के उदय में कृष्ण लेश्या होती है और एक मिथ्यात्व के उदय में शुक्ल लेश्या होती है । जिस समय मिथ्यात्व प्रकृति का मन्द, मन्द उदय चलता है। उस समय इस जीव के बगानुयोग और द्रव्यानयोग के अनुसार सम्यग्दर्शन हो गया है, ऐसा. जान पड़ता है, परन्तु करणानुयोग के अनुसार वह मिथ्यादष्टि ही रहता है । एक भी प्रकृति का उसके संवह नहीं होता है । बन्ध्र और मोक्ष के प्रकरण में करणानुयोग का सम्यग्दर्शन ही अपेक्षित रहता है, अन्य अनुयोगों का नहीं । यद्यपि कर गानुयोंग .. प्रतिपादित सम्यग्दर्शन की महिमासवोपरि है, तथापि उसे पुरुषार्थपूर्वक प्रान्त नहीं