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________________ निशान देवेन्द्र नाचाय क्रमांक अध सरल मंगल देशना संस्थान . ज 1. मनुष्य जन्म अत्यन्त दुर्लभ है, यदि तुमने इस में धर्म की / __ कमाई नहीं की तो आगामी भव में दुःख भोगना होगा / 2. जिनेन्द्र भगवान की वाणी में अविचलित श्रद्धा धारण करो। पागम की श्रद्धा से जीवों का अनन्त कल्याण हुआ है। 3. तुम शरीर से भिन्न चेतनापुंज प्रात्मा हो / जिनसे शरीर का हित होता है, उनसे प्रात्मा का कल्याण नहीं होता / सदा अपने स्वरूप का विचार करना चाहिये / प्रात्म: चितन के बिना मोक्ष नहीं मिलेगा / 4. संयम धारण करके डरो मत ! यह संयम तुम्हारे लिये सच्चा कल्याण-प्रदाता है। . 5. धर्म का मूल सत्य और अहिंसा है। इस धर्म के द्वारा . सच्ची और अबिनाशी शान्ति मिलेगी। परम पूज्य प्राचार्य रत्न श्री 108 शांतिसागरजी महाराज .
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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