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अध्याय ग्यारहवां ]...
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की जात के, न मरे वह कभी परान प्रांत ।" क्योंकि संसार में परिभ्रमण करने के लिये एवं भव्य के लिये भाग्य प्रधान है पुरुषार्थ गौरा है, किन्तु मोक्ष प्राप्ति के लिये भव्य के लिये पुरुषार्थं प्रधान एवं भाग्य गौण है । --श्री कनकनंदी सुनि
सुरम्य है ये नगरी महान गांव श्रवण बेलगुल नाम । बाहुबलिप्रभू ति महान विद्यगोरिपर्वत पर जान ॥ १३॥ संवत दो हजार उनहाल अक्षय तृतीया दिवस महान । पूरण फीतो ग्रंथ ये जान, गौमट प्रश्नोत्तर है नाम ||२|| श्रीजम कर के बन्दोपाय मुतिपुरी की मुझ को चाह । इक पद की नहीं चाह, मिले निजातम गुण भंडार ॥३॥ जिन वारणी सरस्वती नमों निर्मलगुणा भंडार । मैं तेरा शरणा गहु हो जाउ भवपार ॥४॥ श्रादि महावीर fariगुरु: प्रमानों वारं वार । सन्मति हो तुम गुरु महा भवसे कर दो पार ॥५॥
श्री मूलसड नन्थास्नाये, सरस्वतीगच्छे, बलात्कार, श्री कुन्दकुन्दा चार्यान्वये श्री आचार्य श्रादि सागरः, तच्छिष्य आचार्य कोल काल सर्वज्ञः प्रष्टविश भाषा विज्ञो महावीर कोलिः तच्छिल्येण श्री गणधराचार्य कुम्यसागरेण "गोम्मट प्रश्नोत्तर चितामणि" नामधेयो ग्रन्थः कर्नाटक प्रदेशेऽतिशय क्षेत्रे श्रवणबेलगोलं नाम नमरे भण्डार बसति जियालये चतुविशति सोर्थङ्कर पादमूले स्थित्वा संवत् २०३८, वीर निर्वाणस्य २५०७ तमे वर्षे वैशाख मासे शुक्लपक्षे अक्षय तृतीयायां बुध बासरे, रोहिणी नक्षत्रे वृष लग्ने प्रारब्धः सं० संवत् २०३६ वीर निर्धारण संवत् २५०८ तमे वैशाखमासे शुक्ल पक्षऽक्षय तृतीयायां सोम वासरे, रोहिणी नक्षत्रे, वृषभलग्ने सप्तपञ्चा शच्चरणी तुङ्गस्थ श्री बाहुबलि नश्चररपार बिन्ये ऽयं समाप्ति मतः ।
ॐ शांति
ॐ शांति
शुभं भूयात् ॐ शांति
ॐ शांति
ॐ शांति
ॐ शांति