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[ गो. प्र. चिन्तामणि प्रश्न :-मिश्र गुणस्थान किसे कहते हैं ? उत्तर :-- सम्यपि यात्रा प्रति के उदय के जीव के न तो केवल सम्यक्त्व रूप
परिणाम होते हैं और न केवल मिथ्यात्व रूप । किन्तु मिले हुबे दही, गुड़ के स्वाद की तरह एक भिन्न जाति के मिश्र परिणाम होते हैं। इसी मिश्र
परिणाम को मिश्र गुणस्थान कहते हैं । प्रश्न :--अविरतसम्यक्त्व गुरणस्थान का क्या स्वरूप है ? उत्तर :-दर्शन मोहनीय की तीन और अनन्तानुबन्धी की चार इन सात प्रकृतियों के
उपशम अथवा क्षय अथवा क्षयोपशम से सम्यवत्व सहित और अप्रत्याख्यानावरण क्रोध, मान, माया, लोभ के उदय से अत रहित परिणाम को अविरत सम्यग्यस्य गुणस्थान कहते हैं ।
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नोट :---सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति से मोक्ष का मार्ग प्रारंभ होता है।
जनदर्शन में सम्यग्दर्शन को मोक्ष की प्रथम सीढ़ी कहा है। सम्यग्दर्शन का अन्त मोक्ष ही है; अतः कहीं कहीं तो सम्यग्दर्शन को ही मोक्ष कहा जाता है । चुकि चौथे गुरण- .. स्थान में सम्यग्दर्शन का प्रादुर्भाव होता है, अतः यहां चौथे । गुणस्थान तक का वर्णन किया है । जो मात्र प्रारंभिक अवस्था वाले जीवों की अपेक्षा से है।
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