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________________ । . . . . FEREST र . . ... या अध्याय : पहला ]. - नहीं होती है। जैसे पित्त उवर बाले रोगी को दुग्धादिक रस कडवे लगते .... हैं। इसी प्रकार इसको भी समीचीन धर्म अच्छा नहीं लगता हैं। प्रश्न :--मिथ्यात्व के कितने भेद हैं ? : उत्तर :--मिथ्यात्व के पांच भेद हैं--एकान्त मिथ्यात्व, विपरीत मिथ्यात्व, संशय .: मिथ्यात्व, अज्ञानमिथ्यात्व और विनय मिथ्यात्व । प्रश्न :- एकान्त मिथ्यात्व किसे कहते हैं ? ... उत्तर :--धर्म धर्मी के 'यहां ऐसा ही है । अन्यथा नहीं, इत्यादि एकान्त अभिनिवेश ... अभिप्राय या श्रद्धा को एकांतमिश्यात्व कहते हैं । जैसे--पदार्थ को एकान्त से .. सर्वथा क्षणिक ही मानना या नीत्य ही मानना या अनित्य ही मानना । प्रश्न :-विपरीत मिथ्यात्व किसे कहते हैं ? . . . . . उत्तर :- सग्रन्थ, निर्ग्रन्थ है, केवली कवलाहार करते हैं-इत्यादि रुचि या श्रद्धा को । - 'विपरीत मिथ्यात्व कहते हैं। प्रश्न :--संशय मिथ्यात्व किसे कहते हैं ? उत्तर :- धर्म का अहिंसा लक्षण है या नहीं-इत्यादि जिनागम में नाना प्रकार का . . संशय को या संशयात्मक श्रद्धा को संशय मिथ्यात्व कहते हैं। प्रश्न :-प्रज्ञान मिथ्यात्व किसे कहते हैं ?.......... उत्तर :-जिसमें हिताहित के विवेक का कुछ भी सद्भाव नहीं हो ऐमी श्रद्धा को ... अज्ञान मिथ्यात्व कहते हैं; जैसे पशुवध में धर्मरूप श्रद्धा । प्रश्न :--विनय मिथ्यात्व किसे कहते हैं ? .. उत्तर :--समस्त देव तथा समस्त मतों में समान श्रद्धा को विनय मिथ्यात्व कहते हैं। प्रश्न :--सासादन गुणस्थान किसे कहते हैं ? .. .. उत्तर :- प्रथमोपशम सम्यक्त्व और द्वितियोपशम सम्यवत्व के काल में जब ज्यादा से .. . . . . ज्यादा ६ प्रावली और कम से कम एक समय मेष रहता है, उस समय किसी एक अनन्तानुबन्धी कपाय के उदय से सम्बनल्य विहीन परिणाम मासादन गुणस्थान कहलाता है । यह गुणस्थान चतुर्थ. गुरणस्थान से मारने की अपेक्षा से होता है। RAS PRASNARY
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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