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[ मो. प्र. चिन्तामणि अमर्तिक दोनों पदार्थ हैं जबकि विज्ञान का विषय केवल मतिक है।
The scripture of phyilosophy described all with out form and possessed of form substances when the science described only possessed of form substances. So it is true that philosophy is the father of the science.
दर्शन विज्ञान का जनक है । दर्शन का क्षेत्र व्यापक एवं विज्ञान का व्याप्य है। इस प्रकार महान् , परम गम्भीर, जिसका अमोघ चिन्ह (विजय पताका) स्याद्वाद है। इसी प्रकार प्रोकायो प्रमोकास में माल स्मरण से मैं जो अनादि कालीन पर समय रूपी देव राज्य में परिभ्रमण कर रहा हूँ वहां से दैव एवं पुरुषार्थ के द्वारा स्वसमय रूपी पुरुषार्थ राज्य में स्वतंत्र से निवास करू यह काम है ।
श्रीमत्यम्म गम्भीर स्वाद्वार मोघलाञ्छनम् । जीयात् त्रैलोक्यनाथस्य, शासन जिनशासनम् ।।२१२६॥
अनादि काल से अनेकता स्वरूपी आत्मा परम पुरुषार्थ के अवलम्बन से रहित होकर अशुभ शुभ पुरुषार्थ के कारण देव रूपी चक्रवर्ती के साम्राज्य में पराधीन होकर भाकुलता का अनुभव कर रहा है । अत्यन्त सुदूर अनादि काल से परम पुरुषार्थ के अभाव से दैव की अधिनता में रहते-रहते एवं उसका ही कार्य करते-करते अपने को भूल बैठा है।
सुद परिचिचा भूदा समस्त वि काम भोग बंध कहा। एयत्तस्सुवलम्भो रगवरि ग सुलभो वित्तस्स ॥२१२७॥
The discourse relating to sence-enjoy ment and karmic bondage is heard understood and experienced by all the mudane souls. But realisation of absoulute one ness with its own nature free from attechment is not easy of attainment.
___ लोगों को काम भोग विषयक बंध की कथा तो सुनने में, परिचय में एवं अनुभव में बार बार पायी हुई है, इसलिये सुलभ है। किन्तु केवल भिन्न प्रात्मा का एकपना होना कभी न सुना, न परिचय में आया और न अनुभव में आपा, इसलिये एक यही सुलभ नहीं है ।
मायाम
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