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________________ दिष्ट अध्याय : दसवां ] [ eet चौदह पूर्वागरूप विपुल विस्तार सहित द्वादशांग के ज्ञानी गुरु श्रुतशानी भगवान भद्रबाहु जयवंत हों । गुरु के द्वारा जीव का महान हित होता है, यह सत्य कृतज्ञ शिष्य के सदा ध्यान में कहिए । पद्य प्रसिद्ध है--- शलाकया । प्रज्ञान- तिमिरान्धानां ज्ञानांजन चक्षु रुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥। २११५ ॥ ॥ गुरु वंदनीय हैं, जिन्होंने ज्ञानांजन युक्त सलाई के द्वारा श्रज्ञानांधकार से ग्रं शिष्यों के नेत्रों को उन्मीलित किया - रोग विमुक्त बनाया । समोकार मंत्र में आचार्य, उपाध्याय परमेष्ठी को स्मरण करते हुए गुरु की वंदना की जाती है । विवेकी व्यक्ति परमार्थ दृष्टि तथा व्यवहार दृष्टि युगल को हित साधक मानता है- अध्यात्म दृष्टि तीर्थ वंदना, देवारावना, गुरु वंदना का निषेध करती हुई, आत्म देव की आराधना को हितकारी बताती है । परमात्म प्रकाश में लिखा है-अणु जि तित्थु मजा हि जिय प्रष्णु जु गुरु उ म सेवि । अण्णु जि देउ म चिति तु प्रथा विमल मुवि ।।२११६ ॥ हे जीव, अपनी आत्मा को छोड़कर किसी अन्य तीर्थ को मत जा, किसी या गुरु की सेवा मत कर तथा किसी अन्य देव की श्राराधना मत कर। इसको पढ़ने वाला एकान्त वादी भोगासक्त व्यक्ति अपने प्रमादी जीवन को पुष्ट करना चाहता है । वह तीर्थ बन्दना, गुरु सेवा तथा मन्दिर जाना, पूजा करना आदि को अनुपयोगी मानला हुआ उपरोक्त शास्त्र की आज्ञा को समक्ष रखता है । वह पूज्यवाद स्वामी के इस कथन को अपने स्वेच्छाचरण का अवलंबन बनता है- यः परमात्मा स एवाहं योहं स परमस्ततः । श्रहमेव भयो पास्यो नान्यः कश्चिदिति स्थितिः ॥२११७॥ जो परमात्मा है, वह मैं हूं, जो मैं हूँ, वह परम आत्मा है, अतः मैं अपने द्वारा उपास्य हूँ, अन्य कोई श्राराधना योग्य नहीं है, ऐसी यथार्थ स्थिति है । इस अभेद भक्ति रूप श्रेष्ठ स्थिति को श्रेष्ठ दिगम्बर श्रमण ही प्राप्त कर सकते हैं, उस स्थिति को साध्य बनाने वाला देव पूजा, गुरु भक्ति, साधनों का प्राश्रय से अपने रागादि विकारों से अत्यन्त मलिन तीर्थ यात्रा यादि जीवन को स्वच्छ
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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