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________________ MOR अध्याय : दसवां ] [ ६७३ शंका :--कुछ भी कहो हमें तो निश्चय की कथनी में मजा आता है। व्यवहार नय की बात हमें नहीं रुचती। निश्चयनय का पक्ष लेने से - हमारी प्रात्मा का उत्थान होगा? समाधान :-यह बहुत बड़ा भ्रम है। किसी भी दृष्टि के एकांत पक्ष से मोक्ष तो कदापि नहीं मिलेगा, यह सत्य हैं। पंचास्तिकाय की अन्तिम गाथा १७२ की टीका में अमृतचन्द्र सुरि ने कहा है। केवल व्यवहार दृष्टि वाला सत्कायों के करने के कारण दुर्गति से बचकर ऊच्चगति में जाकर सुखी रहेगा। निश्चयपक्ष का एकांतवादी अपने को पूर्ण शुद्ध समझ बैठे हैं । त्याग संयम सदाचार का उनको दृष्टि में कोई मूल्य नहीं होने से वे प्रभात की कादम्बरी (मदिरा) पान के फलस्वरूप "केवलपापमेव बध्नाति" केवल पाप का ही बंध करते हैं। इससे वे कुगति में जाकर दुःख भोगते हैं। सदाचार की बड़ी महत्ता है। यदि सम्यक्त्व रहित जीव भी हीनाचार का त्याग करता है, तो सदाचार के प्रभाव से वह नरक पशु पर्याय में नहीं जाता है । सकेला सम्यक्त्य' मोल नहीं देता है ! . . . प्रवचनसार में कुदकुद स्वामी ने कहा है :सदहमारणो अत्थे प्रसंजयो का परिणदि ॥२३७।। तत्व श्रद्धान हो जाने पर भी असंयमी व्यक्ति मोक्ष नहीं पाता । चारित्र का चमत्कार :--कानंजी पंथी मंडली को यह बात नहीं भूलना चाहिए कि सम्यक्त्व से अकेला काम नहीं बनेगा। भरतेश्वर ने अन्तर्मुहूर्त में केवल ज्ञान प्राप्त किया था, यह सम्यक्त्वचारित्र का चमत्कार था। वे क्षायिक सम्यक्त्वी होने से गृहस्थावस्था में भी ज्ञानी थे, किन्तु उनके केवलज्ञान नहीं हुआ। जब परिग्रह त्याग करके उन्होंने शुक्ल ध्यान रूप चारित्र का आश्रय लिया तब कैवल्य का प्रकार उन्हें प्राप्त हो गया । अन्तर्मुहूर्त में कैवल्य प्रदान करने की क्षमता सम्यक्चारित्र में ही है । कहा भी है : अनंत सुख सम्पन्न येनारमा क्षणावपि । नमस्तस्मै पवित्राय पारिनाय पुनः पुनः ॥२०८६॥ __यह आत्मा क्षरण मात्र में जिसके कारण अनंत सुख को प्राप्त होता है । उस पवित्र चारित्र (यथाख्यात चारित्र) को बारम्बार नमस्कार हो । E GARAMAbohdx300
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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