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________________ अध्याय : दसवां में पूजादिक सब क्रियानी को छोड़ बैठते हैं। दिगम्बर साधुनों के निन्दक बन जाते हैं । इन लोगों ने पूर्वाचार्यों कृत शास्त्रों को हटा-हटाकर कई मन्दिरों में अपना साहित्य भर दिया है। ये लोग प्रथमानुयोग, चरसानुयोग, करणानुयोग को नहीं मानते हैं और द्रव्यानुयोग के अनुसार ही स्वयं चलते और दूसरों को चलने का उपदेश करते हैं। इनका साहित्य दिगम्बर परम्परा से विरुद्ध है और पूर्वाचायों की लेखनी से विपरीत है। मात्र ईसाइयों की तरह पैसे के बल से अपना प्रचार कर रहे हैं। इसलिए इस सिद्धान्त का दिगम्बर परम्परा में कोई महत्व नहीं है । ये भी एक तरह के दिगम्बरा प्रश्न :---जिनेन्द्र भगवान का नय चक्र कैसा होता है। मीथ्यात्विों के लिए? उत्तर :-अत्यन्त निशित धारं दुरासदं जिननरस्य नय चक्रम् । खण्डयति धार्यमाणं मूर्धानं झटिति विग्यानाम् ।।२०१६॥ यह जिनेश्वर का स्यावाद चक्र (नयचक्र) महान कष्ट से प्राप्त होता है । इस चक्र की धार अत्यन्त पैनी होती है। इसको धारण करने वाला अत्यन्त शीघ्र मिथ्याज्ञान के अहंकार युक्त व्यक्तियों के मस्तक को विदीर्ण कर देता है। अर्थात् यह उनके मिथ्याज्ञान का क्षय कर देता है । संसार में ३६३ प्रकार की मिथ्या मान्यताओं वाले मूढ़ जीव अविवेक तथा मिथ्यात्व से प्रेरित हो अपनी प्रात्मा को कुगति में डालते हैं। तथा दूसरे भी अभोग प्राणियों को वे कुपथ में लगाते हैं। वे "अन्धे मुरु-लालची चेला". दोनों नरक में "ठेलम ठेला" यह कहावत चरितार्थ करते हैं। एकांतवाद की महामारी जैन समाज में फैल रही है । और समाज का अहित कर रही है । एकांतवादी वर्ग को स्याद्वाद चक्र की शक्ति को स्मरण कर विवेक से काम करना चाहिए। मिथ्यात्वी के पतन की बात उनके ध्यान में रहनी चाहिए। __ . एकांतवादी लोग अनेक प्रकार की कपोल कल्पित आगम बाधित बातों का प्रचार कर मिध्या ज्ञान की ओर जनसाधारण के मन को मोड़ा करते हैं । हमने कुछ प्रश्नों का उल्लेख कर उस सम्बन्ध में आगम की दृष्टि समाधान रूप में प्रस्तुत की है । जैनधर्म के रहस्य को समझने के लिए स्याद्वाद दृष्टि का अवलम्बन लेना RATE
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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