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________________ अश्याय : दसवां । है, उसके प्रारम्भ में मनुष्य धुएं के रंग के होंगे दो हाथ ऊचे होंगे । बन्दरों के समान नग्न होंगे । उनको उत्कृष्ट आयु २० वर्ष होगी । एक दिन में अनेक बार भोजन करेंगे मांस भक्षी होंगे। उनके निवास बिलों में होंगे। उस समय नगर, पुर, गांव आदि की रचना नहीं रहेगी। उनका स्वभाव दुष्ट होगा । नरक वा तिर्यञ्च गति से आये हुए ही वहां पर उत्पन्न होते हैं। अपनी माता भगिनी पुत्री आदि स्त्रियों के साथ ही पशुओं के समान काम सेवन करेंगे। तथा अपनी आयु के अन्त में मरकर तिर्यञ्च वा नरक में ही उत्पन्न होंगे । इस प्रकार छठे दुःखमा-दुःखमा काल में दुराचारी, महापापी मनुष्य होंगे और वे घोर दुःखों के भोगने वाले होंगे । उस समय बादलों में पानी नहीं रहेगा, पृथ्वी के वृक्षादिक वनस्पतियों में कोई रस स्वाद नहीं रहेगा। मनुष्य स्त्रियां सब निराश्रय रोगी उस छठे काल के अन्त में मनुष्य की ऊंचाई एक हाथ की होगी । वे बहुत कुरुप होंगे । उस समय उत्कृष्ट श्रायु सोलह वर्ष को होगी । तथा शीत ऊष्ण की बाधा से वे बहुत ही पीडित. होंगे सो ही सिद्धान्तसार दीपक के नौवें अधिकार में लिखा है अस्थायी मार्गाभा गर जस्तोः । शाखामृगोपमा नग्ना वर्षविशतिजीविनः ॥२०१०।। मांसाचाहारिणोनेक वाराशिनो दिन प्रति । बिलादिधासिनो दुष्टा आयान्ति दुर्गति द्वयात् ॥२०५१॥ मात्राविकाम सेवांधास्तिर्यक् नरक गामिनः । भविष्यन्ति दुराचाराः पापिनो दुख भोमिनः ॥२०८२॥ तस्मिन्काले शुभातीते मेघाः स्वच्छ जला प्रदाः । स्वादु वृक्षोज्झिता पृथ्वी निराश्रया नरास्त्रियः ॥२०६३॥ कालस्यान्ते करकोच्चदेहा नरा कुरूपिरणः । उत्कृष्ट षोडशाब्दा घुष्काः शीतोष्णादिपोडिसाः ॥२०६४॥ प्रश्न :--एक दिन के दीक्षित मुनिराज को सौ वर्ष की दीक्षित भी अजिका नमस्कार करे या नहीं ? उसर :--एक दिन के दीक्षित मुनिराज को सौ वर्ष की दीक्षित अंजिका अथवा अजिकाओं की गुर्वाणी गरिण अजिका भी नमस्कार करती है, इसका कारण यह
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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