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________________ ६५० ] [ गो. प्र. चिन्तामणि अर्थात्--यह जीव जहां जन्म लेता है, वहीं रम जाता है, क्रीडा करने लगता है, वहीं सुख मानता है और वहां ही बहुत दिन तक रहकर जीना चाहता है । इसीलिये सज्जन पुरुष वा उत्तम मनुष्य समस्त प्राणियों पर दया पालन करते हैं । भारत में लिखा है-- यस्य चितं द्रवी भूतं कृपया सर्वजन्तुषु । सस्य ज्ञानं च मोक्षं च कि जटा भस्म चाम्बरैः ।।२०४०॥ जिसका हृदय समस्त प्राणियों में होने वाली दया के द्वारा द्रवीभूत है, कोमल है, उसी को झान की प्राप्ति होती है और उसी को मोक्ष की प्राप्ति होती है । ज्ञान और मोक्ष के लिये जटाओं का बढ़ाना, शरीर में भस्म लगाना तथा मेरु आदि के रंगे हुए वस्त्रों को धारण करना सब व्यर्थ हैं। बिना दया के केवल भेष धारण . करना स्वांग है, उस भेष से मोक्ष नहीं मिल सकता । वह भेष केवल लोभ के लिए है। यदि जीवों के य करने में, जीमों को हिरने में अर्थ है और जीवों का घात करने वाले वा मांस भक्षण करने वाले पुरुष स्वर्ग में जाते हैं, तो फिर संसार का त्याग करने वाले व्रती, संयमी, तपस्वी वा अनेक यम नियमों को धारण करने वाले पुरुषों को स्वर्ग लोक की प्राप्ति कभी नहीं होनी चाहिये। ऐसे तपस्वियों को फिर नरक की प्राप्ति होनी चाहिये परन्तु ऐसा होता नहीं है । भागवत में लिखा है-- यदि प्रापिषधे धर्मः स्वर्गश्च खलु जायते । संसार मोचकानां तु कुतः स्वर्गाभिधीयते ॥२०४१॥ इससे सिद्ध होता है कि जीवों की हिंसा करने वाले मांस भक्षण करने वाले वा और भी सप्त व्यसनों का सेवन करने वाले जीव ही नरक में जाते हैं। लिखा घसं च मासं च सुरां च वेश्यां पापद्धखोरोपरदार सेवाम् । सेबन्ति सप्तव्यसनानि लोकाः धोरातिधोरे नरके प्रयान्ति ॥२०४२॥ .. अर्थ-जूया खेलना, मांस भक्षण करना, मध पान करना, वेश्यासेवन करना, शिकार खेलना, चोरी करना और परस्त्री सेवन करना ये सात व्यसन कहलाते हैं । जो पुरुष इन सातों व्यसनों का वा इनमें से किसी भी व्यसन का सेवन करते हैं, वे धोर से भी महाघोर नरक में जाते हैं । इन व्यसनों के सेवन करने का ऐसे ही नरक में जाना ही फल है।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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