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________________ । अध्याय : दसर्वा ] [ ६४६ है तथा यह बहुत ही भयभीत हो जाता है। सो ठीक ही है, क्योंकि इस संसार में मृत्यु के समान और कोई भय नहीं है । ऐसी हिंसा को न जाने लोग किस प्रकार करते हैं। भारत में लिखा है-- कंटकेनापि बिद्धस्य महती वेदना भवेत् । वक्रतासिशक्त्या . छिद्यमानस्य किं पुनः ॥२०३७॥ अर्थ :--यदि अपने पैर आदि शरीर में कहीं कांटा भी लग जाय तो उससे बड़ी भारी वेदना वा दुःख होता है फिर भला अन्य जीवों पर चक्र, भाला, बरछा, तलवार, शक्ति सीर, गोली आदि अनेक प्रकार के शस्त्रों के प्रहार करने पर छिदते वा मरते हुए उन जीवों को कितना दुःख होता होगा । : अपने शरीर में कांटे का भी महादुःख होता है और उस कांटे से बचने के लिए जूता पहनते हैं वा और अनेक उपाय करते हैं परन्तु वे ही लोग अन्य जीवों पर शस्त्रों का प्रहार करते हए उनके शरीर में अनेक धाव करते हुए उनको मार डालते हैं यह कितना बड़ा अन्याय है । ऐसे लोग शिकारी व व्याध कहे जाते हैं। उनके बटन क्षेत्र मानि भी प्रदा विकराल गौर पाप रूप दिखाई पड़ते हैं। भारत में लिखा है-श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कियो दधारकचन मेरु कृत्स्ना चापि वसुन्धराम् । एकोऽपि जोषितं दद्यात् न च तुल्यं युधिष्ठिर ।।२०३८॥ .. अर्थ :---श्रीकृष्ण कहते हैं कि हे युधिष्ठिर ! किसी पुरुष ने मेरु पर्वत के समान सुवर्ण दान दिया तथा समस्त द्वीपों की समस्त पृथ्वी दान दे दी। किसी. दूसरे मनुष्य ने किसी एक जीव को अभयदान दिया अर्थात् उसे मरने से बचाया, उसे जीवनदान दिया; तो उस सुवर्णदान वा पृथ्वी दान देने वाले का पुण्य जीवदान देने वाले के पुण्य के समान नहीं होता। . ... . . भावार्थ--उस सुवर्णदान वा समस्त पृथ्वीदान से भी एक जीव के अभयदान का पुण्य बहुत अधिक है। संसार में अभयदान के समान और कोई पुण्य नहीं है अथवा कोई दान नहीं है । . जो लोग अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए. जीवहिंसा की पुष्टि करते हैं, वे अत्यन्त दुष्ट और नीच हैं। भारत में लिखा है-- यो यत्र जायते जन्तुः स तत्र रमते चिरम् । ततः सर्वेषु भूतेषु मयां कुर्वन्ति साधकः ॥२०३६।।
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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