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अध्याय : पहला ] . .
[ ५१ . तीर्थकर, साहारक, ग्राहारकाङ्गोपाङ्ग इन तीनों के बिना तिर्यंच के सामान्य एक सौ सत्रह का बंध होता है। मनुष्य गति में एक सौ बीस प्रकृति का बंध होता है । इन एक सौ वीस का मनुष्य नाश करता है, तब मोक्ष प्राप्ति होती है।
कोष्टक
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गग
मि.
सा. मि.
अ. दं. प्र. अ. अ. अ. सू. उ. क्षी. स. अ.
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देव.
१०४ ६६ ७० ७२ ० ० ० ० ० ० ० ०
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तियच
११७ १०१ ६६ ७२ ६७ ० ०
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प्रश्न :--ससस्त जीवों को उत्कृष्ट प्रायु कितनी है ? उत्तर :-गेरू, हरताल आदि कोमल पृथ्वीकायिक जीव की उत्कृष्ट प्रायु बारह हजार
वर्ष की है । पाषाण आदि कटोर पृथ्वीकायिक की उत्कृष्ट अायु बाईस हजार वर्ष की है। जलकायिक जीव की सात हजार वर्ष, वायुकायिक की तीन हजार वर्ष, वनस्पतिकायिक जीव की उत्कृष्ट प्रायु दस हजार वर्ष की । अाकाश में उड़ने वाले पक्षियों की प्रायु बहत्तर हजार वर्ष की और सों की उत्कृष्ट स्थिति बियालीस हजार वर्ष की, अग्निकायिक की उत्कृष्ट स्थिति तीन दिन की। शंख अादि दो इन्द्रिय जीव की उत्कृष्ट स्थिति बारह वर्ष की है। गोभी आदि के श्रिइन्द्रिय जीव की उत्कृष्ट स्थिति ४६ दिन की । भ्रमर आदि चौइन्द्रिय जीव की उत्कृष्ट स्थिति छह मास की। जो छाती के बल चलने वाले जीव सरी, सर्प की उत्कृष्ट प्रायुं न पूर्वाङ्ग की होती है । मत्स्य की उत्कृस्ट आयु एक कोडी पूर्व की है । मनुष्य और तिर्यच्च वी उत्कृष्ट प्रायु भोग भूमियों की तीन पल्य और कर्म भूमियों की आयु . कोटिपूर्व की है । देव और नारकी की उत्कृष्ट अायु तैतीस सागर की है।
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DISTERS
CHANNE
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