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________________ १२४ ] [ गो. प्र. चिन्तामणि यदि गर्भ-विपतिः स्यात् स्त्रावणं सापि योषितः । याघन्मासं स्थितो गर्भस्तावद्दिनानि सूतकम् ॥१९४८॥ पंचाहान् सूतक क्षत्रे दशाहान् ब्राह्मणे विदुः । द्वादशाहान् च वैश्ये हि शूद्र पक्षक सूसकम् ॥१९४६।। सतीनां सूतक हत्यापापं षण्मासकं भवेत् । अन्येषामपहल्यानां ययापापं प्रणाशयेत् ॥१९५०॥ . महिण्याः पक्षक क्षीरं मोक्षीरं च दिनं दश। .. अष्टमे दिवसेजायाः क्षीरं शुद्धं न चान्यथा ॥१६५१॥ इस प्रकार सूतक का सामान्य वर्णन समझना चाहिए । प्रश्न :-गोत्री को सूतक किस प्रकार पालना चाहिए ? उत्तर :-यदि मोत्री चौथी पीढ़ी तक का हो तो उसको दस रात तक सूतक लगता है, पांचवीं पीढ़ी वाले को छह रात का सूतक लगता है। छठी पीढ़ी वाले को चार दिन का सूतक लगता है, चार दिन बाद वह शुद्ध होता है । सातवीं पीढ़ी वाला तीन दिन बाद शुद्ध होता है । आठवीं पीढ़ी काले को एक दिन रात का सूतक है, पीछे वह शुद्ध है। नौवीं पीढ़ी वाले को दोपहर का सूतक है तथा दसवीं पीढ़ी वाले को स्नान करने मात्र का सूतक है। इसके बाद शुद्ध है। इस प्रकार गोत्र का सूतक समझना चाहिए । सो ही मूलाचार की टीका में लिखा है चतुर्थे वशरात्रिः स्यात् षट्रात्रिः पुन्सि पञ्चमे। षष्ठे चतुरहः शुद्धिः सप्तमे दिनत्रयम् ॥१६५२।। अष्टमे पुम्स्य हो रात्रिः नवमे प्रहर द्वयम् । धशमे स्नानमात्रं स्यालेसद् गोत्रस्य सूतकम् ॥१६५३॥ इस प्रकार गोत्री के सूतक का विचार है। दूसरी तीसरी पीढ़ी का सूतक पहली पीढ़ी के समान है। बाद में सूतक के दिन घटते जाते हैं। ऐसा समझ लेना चाहिए। प्रश्न :--मुनि को अपने गुरु आदि के मरने का सूतक किस प्रकार है ? तथा राजा के घर मृत्यु आदि का सूतक किस प्रकार है ? उत्तर : ---मुनि तो एक कायोत्सर्ग कर लेने पर क्षण भर में ही शुद्ध हो जाते हैं । तथा राजा के पांच दिन का सूतक लगता है । सो ही प्रायश्चित शास्त्र में लिखा है----
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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