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________________ ६२२ ] [ मो. प्र. चिन्तामणि पूर्वक महाभिषेक करना चाहिये। फिर एक सौ आठ बार मूल मंत्र से प्राइति क्षेनी चाहिये । तथा उस भग्न हुये प्रतिबिंब को किसी अगाध जल में विराजमान कर देना चाहिये ऐसा करने से वह दोष दूर होता है और शांति होती है। सो हि जिनसंहिता में लिखा है... स्तापयेदंग भंगेष्ट सहस्त्र रस जिनेश्वरम् । होमं वा पातंवरकुर्याद् भग्नं चांगं सुसेवयेत् ।।१६४१।। ततो जलधि वासादि प्रतिष्ठापन माचरेत् ।। प्रश्न :---जैन मत में गृहस्थों के सूतक पातक के विचार को विधि क्या है ? उत्तर :--सुतक दो प्रकार का है जो गृहस्थ के घर पुत्र पुत्री आदि का जन्म हो तो दश दिन का सूतक है यदि मरण हो तो बारह दिन का सूतक है । जिस घर में वा जिस क्षेत्र में प्रसुति हो उसका सूतक एक महिने का है । यह सूतक जिसके घर जन्म हो उसको लगता है । जो उसके गोत्र वाले हैं, उनको पांच दिन का सूतक लगता यदि प्रसूति में ही बालक का मरणा हो जाय तो अथवा देशांतर में किसी का मरण हो जाय या किसी संग्राम में मरग हो जाय अथवा समाधिमरण से प्राग छोड़े हो तो इन सबका सूतक एक दिन का है। _ .धोड़ी, गाय, भैस, दासी प्रादि की प्रसूति यदि अपने घर में वा आंगन में हो तो उसका सूतक एक दिन का लगता है, यदि गाय, भैस आदि की प्रसूति घर में न हो घर के बाहर किसी क्षेत्र में वा बगीचे में हो तो उसका सूतक नहीं लगता। . जिस गृहस्थ के यहां पुत्रादिक का जन्म हुअा है, उसको बारह दिन पीछे भग- .... वान अरहंतदेव का अभिषेक, जिनपूजा और पात्रदान देना चाहिये, तब उसकी शुद्धि होती है अन्यथा शुद्धि नहीं होती। यदि दासी दास वा कन्या की प्रसूति वा मरणा अपने घर हो तो उस गृहस्थ को तीन दिन का सूतक लगता है । वह प्रसूति या मरण अपने घर हुआ है, इसलिये दोष लगता है। . यदि किसी गृहस्थ के स्त्री के गर्भ का स्त्राव हो जाय वा पात (गर्भ पात) '.:: : हो जाय तो जितने महीने का वह गर्भ हो उतने ही दिन का सूतक लगता है, इस
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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