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________________ अध्याय : दसवां ] [ ६१३ इस प्रकार इनकी जघन्य स्थिति बतलाई। अब आगे इन पांचों शरीरों की उत्कृष्ट स्थिति बतलाते हैं । भोग भूमियों को अपेक्षा । . ..... . . ____ औदारिकों की बंध रूप उत्कृष्ट स्थिति तीन पल्य है। देव नारकियों की अपेक्षा वैक्रियिक की तैतीस सांगर है। आहारक की अंतमुहूर्त है। तेजस. शरीर की छयासठ सागर है । कार्माण शरोर की उत्कृष्ट स्थिति सामान्य रीति से सत्तर कोडीकोडी सागर है तथा विशेष रीति से ज्ञातावरण, दर्शनावरण, वेदनीय और अंतराय की तीस कोडा कोडी सागर है, नाम, गोत्र की बीस कोडा कोडी सागर है। सो ही मोम्मटसार में लिखा है पल्लतियं उबहीण तेत्तीसं तो मुहस उवहीणं । - छादि कम्भट्ठिदि बंधुकस्सद्दिी ताणं ॥१९२४॥ प्रश्न :-चारों हो गति वाले जोधों के वर्तमान को अपनी प्रायु में अन्य .. गति श्रायु अंध किस-किस काल में होता है, और किस-किस गति __ की आयु का बंध होता है ? उत्तर :-- देवगति और नरकगति के. जीवों की आयु. जब अधिक से अधिक छह महीने की रह जाती है, तब दे मनुष्य अथवा तिर्यञ्चः प्रायु का बंध करते हैं। . ... भावार्थ ::-देबों की आयु जब छह महीने की रह जाती है, तब वे मिथ्यात्व के उदय से होने वाले अपने अपने परिणामों से पृथ्वीकायिक, जलकायिक, वनस्पतिकायिक, मनुष्य और पशु इन पांच प्रकार की गतियों में से किसी भी एक गति के लिए आयु बंध कर लेते हैं। इसी प्रकार नारकी जीव मनुष्य अथवा तिर्यञ्चगति की प्राय का बंध करते हैं, सातवी पृथ्वी के नारकी जीव केवल-एक तिर्यञ्च गति का ही श्रायु बंध करते हैं । सातवें नरक के जीवः मनुष्य: गति का बंधः नहीं करते। मनुष्य तथा तिर्यञ्च गति वाले जोब जब अपनी वर्तमान आयु का तीसरा भाग रह जाता है। तब वे अपने-अपने भावों के अनुसार चारों हो पातियों में से किसी एक गति का वायु बंध कर सकते हैं । भागभूमियों के मनुष्य तिर्यग्न्च भी अपनी प्रायु के छह महीने बाकी रहने पर देवगति का ही प्रायु बंध करते हैं । एकद्रिय, दो इंद्रिय, ते इंद्रिय, चौ इंद्रिय जीय मनुष्य का तिर्थञ्च गति की आयु का बन्ध करते हैं। इनमें भी तेजस्काय और बायु काय के एकद्रिय जीव तिर्यञ्च प्रायु · का ही बन्धः करते हैं। ये दोनों ही
SR No.090436
Book TitleGommat Prashnottar Chintamani
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1124
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Religion, & Karma
File Size37 MB
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